समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों के तुरंत बाद बुधवार को कोलकाता पहुंच रहे हैं. वहां वे तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे. यह चुनाव नतीजों के बाद किसी प्रमुख विपक्षी नेता का बंगाल का पहला दौरा होगा. मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ममता बनर्जी ने खुद इस मुलाकात की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि अखिलेश ने मुझसे अनुरोध किया कि क्या वह आज ही आ सकते हैं, लेकिन मैंने उन्हें कल आने को कहा, तो, वह कल आएंगे. एक-एक करके सब आएंगे. ममता ने साफ इशारा किया कि उनका लक्ष्य INDIA गठबंधन को और मजबूत करना है. पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान अखिलेश यादव मैदान में उतरने के बजाय सोशल मीडिया के जरिए ममता बनर्जी के समर्थन में सक्रिय रहे. नतीजे आने के बाद सोमवार को अखिलेश ने सोशल मीडिया X पर कई पोस्ट किए. पहली पोस्ट में उन्होंने भाजपा की जीत को फरेब करार देते हुए शेर लिखा.हर फरेबी फतह की एक मियाद होती है, ये बात ही सच्चाई की बुनियाद होती है. दूसरी पोस्ट में अखिलेश ने 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव और फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मतगणना में केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया गया. उन्होंने ममता बनर्जी का पुराना वीडियो भी शेयर किया. तीसरी पोस्ट में महिला आरक्षण पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि जब परिणाम ही मनमर्जी से निकाले जा रहे हैं तो मुख्यमंत्री भी मनमर्जी से बन सकता है. उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में पर्ची वाली टिप्पणी की. जनवरी 2025 में अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव के साथ कोलकाता जा चुके हैं और तब उन्होंने ममता बनर्जी को चुनावी समर्थन देने का ऐलान किया था. अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार की नहीं है. राजनीतिक विश्लेषक इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर INDIA गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते कि इस बार की मुलाकात में बंगाल चुनाव नतीजों, केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है. अखिलेश यादव अच्छी तरह जानते हैं कि भाजपा के सामने अकेले मुकाबला करना कितना चुनौतीपूर्ण है. ममता बनर्जी के अकेले चुनाव लड़ने और परिणाम देखने के बाद सपा अध्यक्ष गठबंधन की अहमियत को और बेहतर तरीके से समझ चुके हैं. ऐसे में उनकी यह यात्रा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश भी है कि विपक्ष एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला कर रहा है. 2027 के चुनाव में INDIA गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने और मजबूत करने की दिशा में यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है. सियासी जानकार यह भी मानते है कि ममता बनर्जी और स्टालिन से अखिलेश यादव के बेहद खरीदी रिश्ते है. अखिलेश पिछले 9 साल से सत्ता से बाहर है. ऐसे में अखिलेश की मदद ममता ने कई मौका पर की है. माना जाता है की अखिलेश यादव को स्टालिन और ममता से वैचारिक सपोर्ट भी मिलता रहा है. इतना ही नहीं अखिलेश यादव की मदद के लिए ममता बनर्जी कोलकाता से चलकर 7 फरवरी 2022 में लखनऊ भी आई थी. और सपा के लिए जनसभा भी की थी. अखिलेश यादव ने भी ममता बनर्जी के कहने पर उत्तर प्रदेश में एक लोकसभा की सीट टीएमसी को भी दिया था. कांग्रेस छोड़कर TMC में ललितेश त्रिपाठी भदोही से लोकसभा चुनाव लड़े. अब जब ममता सत्ता से बाहर हो गई है तो अखिलेश यादव उनसे मिलकर अपने रिश्तों को बरकरार रखने का भरोसा भी देंगे. सियासी जानकारी यह भी मानते हैं कि अखिलेश यादव भी ममता बनर्जी की तरह ही रिश्तों को निभाने वाले हैं. ऐसे समय में जब ममता को इंडिया ब्लॉक के लिए खड़ा करने की जरूरत होगी तब अखिलेश उनके साथ होंगे. पंकज चतुर्वेदी पिछले 11 साल से देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुवात हुई.दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अदंर की खबर को बाहर लाने का हुनर के साथ ही यूपी के ब्यूरोकेसी में खास पकड़ रखते हैं.इनकी पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही आप तक पहुंचाना है.
अखिलेश यादव कोलकाता में ममता बनर्जी से मिलेंगे, विपक्षी गठबंधन को मजबूत करेंगे
TV9 Hindi•

Full News
Share:
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: TV9 Hindi
Want to join the conversation?
Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.