जे. एन. यू. प्रोफेसर कई आरोपों के बाद बर्खास्त और यौन उत्पीड़न के आरोप में बरी
मई 2026 का पहला हफ्ता। JNU के सोशल साइंस डिपार्टमेंट में एक रूटीन क्लास जल्दी खत्म हो गई। जाते-जाते प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम ने कहा कि वाइवा से पहले किसी का कोई सवाल या डाउट हो, तो घर आकर बात कर सकता है। सर ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘We will have JNU में उन्हीं के डिपार्टमेंट की एक स्टूडेंट के मुताबिक, घर पर ऐसी क्लासेज हमेशा होती थीं। इसमें आने वाले लड़कों को घर जाने को कह दिया जाता, लेकिन 6-7 लड़कियां वहीं रुकती थीं। सर के व्यवहार की चर्चा पहले भी होती रही है, लेकिन कोई सामने नहीं आता था। जब पहली बार एक लड़की ने खुलकर अपना एक्सपीरियंस शेयर किया, तो दूसरी छात्राओं को भी हिम्मत मिली। प्रोफेसर बिमोल के खिलाफ 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न और अनुचित बर्ताव की शिकायतें की हैं। यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी ने जांच में कई आरोप सही पाए। 9 अक्टूबर को उन्हें बर्खास्त किया और 11 अक्टूबर को FIR दर्ज हुई। हालांकि, छात्र बताते हैं कि प्रोफेसर अक्सर कहते थे, 'मैं हैंडसम हूं, इसलिए ऐसे आरोप लगते हैं।' मामले को लेकर हमने यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स से बात की। हमारे हाथ में यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी की जांच रिपोर्ट भी लगी है। सोशल साइंस डिपार्टमेंट की एक छात्रा बताती हैं, ‘मई में हुई क्लास में मैं भी थी। पहली बार प्रोफेसर बिमोल के घर गई थी। हम 10-12 लड़के-लड़कियां थे। उनमें से कुछ पहले भी सर के घर जा चुके थे। शुरू में बातचीत नार्मल रही। सब्जेक्ट रिलेटेड डाउट्स पर बात हुई। धीरे-धीरे बातचीत पर्सनल होने लगी। वो घर परिवार और फैमिली बैकग्राउंड पूछने लगे। पहले लगा कि वो हमें सहज महसूस कराना चाहते हैं। फिर ये सब जरूरत से ज्यादा हो गया। वो लेक्चर देते हुए कभी भी आकर हमारा हाथ पकड़ लेते थे।’ उन्हीं के डिपार्टमेंट की एक और स्टूडेंट ने बताया, ’प्रोफेसर क्लास के अलावा घर पर भी वाइवा लेते थे। 6 मई को भी उन्होंने बुलाया था। क्लास में उनका बर्ताव खराब रहता था। पूरी क्लास के सामने डांटते और कहते- ‘टिश्यू लाऊं, इसकी जरूरत तो नहीं पड़ेगी?’ लेकिन घर पर वाइवा आसानी से हो जाता था। लगता ही नहीं था कि ये वही हैं, जो क्लास में थे?’ ’क्लास के लिए भी कई बार घर बुलाया, जो कई बार सिर्फ 5 मिनट चलती थी। रॉन्ग टाइम या अभी कुछ काम आ गया का बहाना बनाकर वो हमें वापस भेज देते थे। जबकि कुछ लड़कियां वहीं रुक जाती थीं। हमें लगता था कि वो प्रोफेसर्स की चहेती हैं। बाद में मामला सामने आने के बाद सच पता चला।’ क्या आप पर भी उन्होंने कोई निजी टिप्पणी की? इस पर छात्रा ने कहा, ’नहीं, मेरी कभी उनसे इतनी करीबी नहीं रही।’ क्या कभी आपको अप्रोच किया? इस पर वे कहती हैं, ’नहीं, कभी सामने से कुछ नहीं कहा। वे कई बार कहते थे कि तुम्हारे सीनियर्स से मेरे काफी क्लोज रिलेशन हैं। हम अब भी साथ ड्रिंक करते हैं। ये एक तरह का इनडायरेक्ट इन्विटेशन था।’ एक छात्र के मुताबिक, प्रोफेसर अक्सर पॉपुलर कल्चर और सिनेमा के उदाहरण देकर पढ़ाते थे। कई बार क्लास में फिल्में भी दिखाईं। एक बार उन्होंने सब्जेक्ट के नाम पर ऐसी क्लिप दिखाई कि सब असहज हो गए थे। उस क्लास में मैं भी था। एक लड़के के तौर पर मैं असहज था, तो लड़कियों का क्या हाल हुआ होगा।‘ छात्र ने बताया, ‘फिल्म दिखाने से पहले वो बोले थे कि विजुअल्स का दिमाग पर ज्यादा असर होता है। जो मैं वर्बल लेक्चर दूंगा, उसे प्रोजेक्टर पर देखो। सारी क्लिप्स में सेक्शुअल कंटेट थे। ये सॉफ्ट पोर्न से बढ़कर था। क्लास के कुछ छात्र असहज थे, कुछ हंस रहे थे। हूटिंग भी हुई थी।’ JNU की एक स्टूडेंट के मुताबिक, ‘सर पर पहले भी स्टूडेंट्स के बीच अश्लील बातें करने का आरोप लगता रहा है। 2025 में भी दो-तीन बार आरोप लगे थे, लेकिन तब ये बातें स्टूडेंट्स के बीच ही रह गईं। उनके किस्से हमारे गॉसिप का हिस्सा थे। हम जब फर्स्ट ईयर में थे, तो सीनियर्स उनके किस्से बताते थे। हमे पता तो था कि ये हमारे साथ भी हो सकता है। यही हुआ भी।’ ’जब हमारे अनऑफिशियल स्टूडेंट्स ग्रुप में क्लास की एक लड़की ने मैसेज किया कि बिमोल सर वियर्ड बिहेव करते हैं। तब कई स्टूडेंट्स सामने आए। वाइवा के दो हफ्ते बाद 18 मई को स्टूडेंट्स ने इंटरनल कमेटी को लिखित शिकायत दी।’ दैनिक भास्कर को ग्रुप के वॉट्सएप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट मिले हैं, जिसमें एक लड़की कह रही है, ’मुझे नहीं पता कि इस पर सपोर्ट मिलेगा या नहीं, लेकिन वाइवा के दौरान बिमोल सर का हाथ छूने के लिए कहना और ये पूछना कि क्विकी क्या होता है, बेहद आपत्तिजनक है।’ यहां क्विकी से मतलब जल्दी में की गई सेक्शुअल एक्टिविटीज हैं। लड़की इसी मैसेज में आगे लिखती है, ‘इस बारे में बात होनी चाहिए, खासकर इसलिए कि लोग अब ऐसे अनुभव खुलकर साझा कर रहे हैं। अगर लोग सहज नहीं भी हैं, तो भी कम-से-कम क्लास के ग्रुप में इस पर बात होनी चाहिए।‘ दैनिक भास्कर को मिली इंटरनल कमेटी की जांच रिपोर्ट में 9 आरोपों से जुड़ी फाइंडिंग्स मिली हैं। प्रोफेसर क्लास में छात्राओं से उनकी निजी जिंदगी और डेटिंग हिस्ट्री के बारे में पूछते थे। एक बार उन्होंने पूछा कि वैलेंटाइन डे पर क्या किया था। कमेटी की जांच में पता चला कि प्रोफेसर ऐसे ही निजी सवाल पूछते थे, जिनका पढ़ाई से कोई संबंध नहीं था। शिकायत में कहा गया कि प्रोफेसर वाइवा के दौरान छात्राओं से पूछते थे कि उनका बॉयफ्रेंड है या नहीं। वे उसके साथ क्या करती हैं, अफेयर के बारे में उनकी क्या राय है। वो अलग-अलग उम्र के लोगों के रिश्तों को कैसे देखती हैं। जांच में ये सब पूछे जाने की पुष्टि भी हुई। कमेटी ने कहा कि इस तरह के सवालों से क्लास का माहौल डराने वाला, अपमानजनक और असहज बन सकता था। शिकायत में कहा गया कि प्रोफेसर अपनी पूर्व छात्राओं के साथ औपचारिक रिश्तों से आगे बढ़कर निजी दोस्ती रखते थे। प्रोफेसर ने पूर्व छात्राओं के साथ अंतरंग संबंधों का खुद जिक्र किया था। ये शिकायत में भी दर्ज है, जिसे कमेटी ने अनुचित व्यवहार माना। शिकायत में कहा गया कि प्रोफेसर कुछ स्टूडेंट्स का वाइवा यूनिवर्सिटी में और कुछ का घर पर लेते थे। इनकी टाइमिंग अलग-अलग रहती थी। कुछ पांच मिनट के होते थे, जबकि कुछ 30 मिनट से एक घंटे तक चलते थे। इसमें कई बार तीसरा व्यक्ति मौजूद नहीं रहता था। एक छात्रा का वाइवा रात 11:40 बजे तक चलने का आरोप भी लगा। कमेटी ने पाया कि वाइवा अलग-अलग जगह और हालात में लिए गए। उनकी अवधि में भी काफी अंतर था। इससे शिक्षक-छात्र के रिश्ते की मर्यादा पर भी सवाल उठते हैं। JNU की इंटरनल कमेटी पर मामले में लापरवाही और जानबूझकर इसे कई महीनों तक दबाने के आरोप लग रहे हैं। एक प्रोफेसर ने नाम न छापने के शर्त पर बताया, ‘बिमल के बारे में कई साल से पता था, लेकिन जब तक छात्र आगे न आएं, कोई कुछ नहीं कर सकता था।' 'मई में करीब 18 लड़के-लड़कियां सामने आए थे। दो या तीन लड़कियां पीछे हट गईं। 15 ने शिकायत की, जिसमें 3 लड़के भी शामिल हैं। नियम के अनुसार 90 दिन में जांच पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन शुरुआती दो महीने ICC ने कुछ नहीं किया।‘ दो महीने क्यों कुछ नहीं किया? क्या प्रोफेसर सांसद हैं, इसलिए मामला ठंडे बस्ते में डाला जा रहा था? प्रोफेसर ने बताया, ‘शिकायत के बाद डेढ़ महीने का सेमेस्टर ब्रेक था। जब स्टूडेंट्स वापस आए और कमेटी से जवाब मांगा, तब जांच शुरू हुई। लड़कियों के पास चैट्स और वीडियोज जैसे सबूत थे। सितंबर में वॉट्सएप चैट्स लीक हुए, तब कमेटी ने अचानक रिपोर्ट जारी कर दी। रिपोर्ट क्यों रोकी जा रही थी। फाइंडिंग की कॉपी भी स्टूडेंट्स को नहीं भेजी गई? इस पर प्रोफेसर कहते हैं, ‘सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि जब यूनिवर्सिटी में GSCASH (जेंडर सेंसिटाइजेशन कमिटी अगेंस्ट सेक्सुअल हॉरेसमेंट) जैसी बॉडी थी, जो सही काम कर रही थी, तब ICC क्यों लाया गया। नियम है कि यूनिवर्सिटी में पहले से कोई वर्किंग बॉडी है, तो ICC जरूरी नहीं है।‘ प्रोफेसर बिमोल ने सभी आरोप खारिज किए हैं। उन्होंने इसे अपने खिलाफ ‘विच हंट’ यानी निशाना बनाकर की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने इंटरनल कमेटी से फेवर मिलने की बात खारिज करते हुए उसी की जांच पर सवाल उठाए हैं। बिमोल ने मीडिया में दिए बयान में कहा, ‘अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब मैंने 31 मई को दिया, लेकिन मेरा पक्ष रिकॉर्ड किए बिना मुझे बर्खास्त कर दिया गया। मुझे इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और बर्खास्तगी का आदेश भी समय पर नहीं दिया गया। जबकि उसमें मैं भी एक पार्टी था।‘ हमने आरोपों पर प्रोफेसर बिमोल कॉल का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। केस और विश्वविद्यालय के जांच के तरीकों को समझने के लिए JNU के VC को भी कॉल और मैसेज किया, उनकी तरफ से भी जवाब नहीं आया। ‘हम सेक्स वर्कर बाद में, पहले इंसान हैं। हमारे वोट देने से क्या सरकार की बदनामी होगी?’ ये सवाल 36 साल की सुरैया पूछ रही हैं। राजस्थान में उनका घर है। वहीं बचपन बीता। सुरैया को 2002 में गांव के बाहर से अगवा कर लिया गया। सुरैया दिल्ली में दो विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में वोट डाल चुकी हैं, लेकिन SIR में नाम कट गया।