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अजमेर में शिया मुसलमान शोक और विरोध के बीच सरलता और शांति के साथ ईद-उल-फितर मनाते हैं

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अजमेर में शिया मुसलमान शोक और विरोध के बीच सरलता और शांति के साथ ईद-उल-फितर मनाते हैं
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अजमेर में ईद-उल-फितर का पर्व इस बार शिया मुस्लिम समुदाय ने सादगी और गमगीन माहौल में मनाया। जहां आमतौर पर ईद खुशियों, नए कपड़ों और जश्न का प्रतीक होती है, वहीं इस बार समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज़ अदा की और पारंपरिक उत्सवों से दूरी बनाए रखी। न तो नए कपड़े पहने गए और न ही घरों में किसी प्रकार का जश्न मनाया गया। पूरे आयोजन के दौरान शोक और संवेदना का माहौल साफ तौर पर देखने को मिला। बताया गया कि यह फैसला अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनाई के निधन पर शोक व्यक्त करने के रूप में लिया गया। समुदाय के लोगों ने इसे श्रद्धांजलि स्वरूप अपनाया और ईद को सादगी के साथ मनाने का निर्णय किया। इस दौरान लोगों में गहरा आक्रोश भी देखने को मिला और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर नाराजगी भी जाहिर की गई। इजराइल और अमेरिका के खिलाफ विरोध के स्वर भी मुखर रहे। ईद-उल-फितर की नमाज़ मौलाना सैय्यद तकी जाफर ने अदा करवाई। इस मौके पर मौलाना सैय्यद शमीमुल हसन और मौलाना हैदर बिजनौरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। नमाज़ के दौरान विशेष रूप से दुनिया में शांति और अमन की कामना की गई। लोगों ने एकजुट होकर मौजूदा वैश्विक तनाव को समाप्त करने की दुआ की। नमाज़ के दौरान समुदाय के लोगों ने शांति, भाईचारे और विश्व में चल रहे संघर्षों के अंत के लिए प्रार्थना की। उनका कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस बार ईद को सादगी से मनाना ही उचित लगा, ताकि शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा सके। पूरे कार्यक्रम में एक गमगीन माहौल बना रहा और लोगों ने एक स्वर में शांति की अपील की। वहीं, ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के दीवान के बेटे नसरुद्दीन चिश्ती ने भी ईद के मौके पर शहरवासियों को शांति और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने अजमेर की सरकारी ईदगाह में नमाज़ अदा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में वैश्विक हालात पर चिंता जताई। नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया का बड़ा हिस्सा युद्ध और तनाव के दौर से गुजर रहा है। कई देश आपसी संघर्ष में उलझे हुए हैं, जिससे वैश्विक शांति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में यह राहत की बात है कि भारत एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण देश बना हुआ है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने त्योहार सौहार्द और भाईचारे के साथ मना रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईद की नमाज़ के दौरान विशेष रूप से उन देशों के लिए दुआ की गई, जहां युद्ध की स्थिति बनी हुई है। प्रार्थना में यह कामना की गई कि वहां जल्द से जल्द अमन-चैन स्थापित हो और निर्दोष लोगों को राहत मिले। नसरुद्दीन चिश्ती ने लोगों से अपील की कि वे आपसी भाईचारे और सद्भाव को बनाए रखें और समाज में सकारात्मक माहौल कायम करने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि ईद जैसे पर्व हमें एकता, प्रेम और इंसानियत का संदेश देते हैं, जिसे हर हाल में बनाए रखना जरूरी है। अजमेर में इस बार ईद का स्वरूप भले ही पारंपरिक जश्न से अलग रहा हो, लेकिन शांति, एकता और संवेदना का जो संदेश इस अवसर पर दिया गया, वह समाज के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनकर सामने आया।

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