औरैया। बिजली चोरी के मामले में अदालत ने बकाया राजस्व निर्धारण धनराशि और शमन शुल्क जमा किए जाने के आधार पर दो अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दिया। विशेष न्यायाधीश विद्युत अधिनियम राजीव कुमार वत्स ने स्पष्ट किया कि धनराशि जमा होने के बाद कार्रवाई जारी नहीं रखी जा सकती।और पढ़ेंTrending Videosकोतवाली व कस्बा बिधूना निवासी रमेश के खिलाफ विद्युत अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की तरफ दलील दी कि रमेश ने विभाग की समस्त बकाया धनराशि जमा कर दी है। आरोपी ने वर्ष 2019 में ही 8132 रुपये राजस्व निर्धारण, दो हजार रुपये शमन शुल्क और अन्य व्यय जमा कर दिए थे। दिबियापुर अधिशासी अभियंता कार्यालय द्वारा दिया गया नो-ड्यूज सर्टिफिकेट भी पेश किया गया।विज्ञापनविज्ञापनइसी प्रकार थाना व गांव एरवाकटरा निवासी राकेश के खिलाफ 2017 में मामला दर्ज किया गया था। चार मई को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि राकेश ने 11408 रुपये की संशोधित बकाया राशि जमा कर दी है। साथ ही विद्युत वितरण खंड दिबियापुर द्वारा 11 जनवरी 2018 को दिया गया अदेयता प्रमाण-पत्र पेश किया।न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स ने कहा कि कानून के अनुसार, यदि अभियुक्त निर्धारित धनराशि और शमन शुल्क जमा कर देता है, तो उसे समाधान माना जाता है। धारा 152(3) के तहत यह प्रक्रिया दोषमुक्ति के समान है। बाद में कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों के प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
अदालत ने बकाया भुगतान के बाद बिजली चोरी मामले में दो अभियुक्तों को बरी कर दिया
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