Health News:मोबाइल और टीवी की लत के कारण रात-रात भर जागने वालों के लिए एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। अब तक अधूरी नींद को केवल थकान या चिड़चिड़ेपन से जोड़ा जाता था, लेकिन अब एक्स्पर्ट्स ने इसे अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों का एक प्रमुख कारण माना है। भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JLNMCH) के डॉक्टरों द्वारा हजारों मरीजों पर की गई एक क्रॉस स्टडी में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। डॉक्टरों के अनुसार, पिछले पांच सालों में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल की ओपीडी में स्लीप डिसऑर्डर यानि नींद की बीमारी का इलाज कराने आ रहे मरीजों में बड़ी संख्या में एलर्जी और अस्थमा के लक्षण भी मिल रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों को मरीजों का स्लीप डिसऑर्डर के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी का भी एक साथ इलाज करना पड़ रहा है। यह समस्या अब केवल अधेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि युवा, किशोर और यहां तक कि छोटे बच्चे भी इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं। JLNMCH के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी और टीबी एंड चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीरेंद्र कुमार शर्मा की संयुक्त अगुवाई में एक खास स्टडी की गई है। जनवरी से जून 2026 के बीच ओपीडी में इलाज के लिए आए 6753 मरीजों की गहन जांच की गई। इन मरीजों को स्लीप डिसऑर्डर और अस्थमा-एलर्जी की दो अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया था। जांच के बाद रिपोर्ट में पता चला कि 63 प्रतिशत मरीजों में स्लीप डिसऑर्डर के साथ-साथ अस्थमा और एलर्जी की भी बीमारी मौजूद है। एक्स्पर्ट्स का स्पष्ट कहना है कि मोबाइल और टीवी के शौक के कारण युवाओं और बच्चों की नींद का टाइमिंग पूरी तरीके से बिगड़ रहा है। जब नींद पूरी नहीं होती है, तो शरीर में सूजन बढ़ाने वाले सेल्स की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर अस्थमा और एलर्जी को जन्म देते हैं। विश्व अस्थमा दिवस के मौके पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 36 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं, और अब बिगड़ती लाइफस्टाइल व अधूरी नींद इस खतरे को और भी बढ़ा रही है।
अधूरी नींद अस्थमा और एलर्जी जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़ीः अध्ययन
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