उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान इस बात पर कड़ा ऐतराज दर्ज कराया कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के तहत प्रशासन को नियमित रूप से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद वर्ष 2019 के बाद से न्यायालय में कोई भी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने तल्ख लहजे में चेतावनी दी कि प्रशासनिक अधिकारियों को जगाना कोर्ट की जिम्मेदारी नहीं है। यदि जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्था के सतत अनुपालन का शपथ-पत्र पेश नहीं करते हैं, तो इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना माना जाएगा। अवधेश सिंह भदौरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित पक्षों को अपने लिखित सुझाव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।विज्ञापनये भी पढ़ें-टहलने निकले एसडीएम को बाइक ने मारी जोरदार टक्कर, आंख के ऊपर की हड्डी में फ्रैक्चर; अस्पताल में भर्तीविज्ञापनअवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी और पुलिस प्रशासन की ओर से संयुक्त स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले 190 चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। इसके अलावा परिवहन विभाग और पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान क्षमता से अधिक बच्चे बैठाने, बिना परमिट, बिना फिटनेस प्रमाणपत्र तथा बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे 87 वाहनों के चालान काटे गए हैं। इस विशेष अभियान से पहले भी प्रशासन ने 83 और 38 वाहनों के चालान बनाए थे। प्रशासन ने शहर के चारों ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों को सख्त हिदायत दी है कि जिस ऑटो या वाहन में अतिरिक्त सीट अथवा फट्टी लगी पाई जाए, उसे किसी भी हाल में फिटनेस प्रमाणपत्र जारी न किया जाए। इसके साथ ही नियम तोड़ने वाले ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा रहा है।अदालती सुनवाई के दौरान ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हाल ही में पदभार ग्रहण करने का हवाला देते हुए प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने अदालत से अगली सुनवाई तक का समय मांगा। उन्होंने उच्च न्यायालय को आश्वस्त किया कि वे पूरी निगरानी व्यवस्था को निरंतर खुद देखेंगे और धरातल पर ठोस और प्रत्यक्ष सुधार पेश करेंगे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने न्यायालय का ध्यान संभाग की व्यापक स्थिति की ओर भी खींचा। उन्होंने बताया कि स्कूली वाहनों की यह खतरनाक स्थिति केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं है, बल्कि संभाग के अन्य नौ जिलों में भी हालात बेहद खराब हैं और वहां प्रशासनिक निगरानी न के बराबर है।
अनुपालन रिपोर्ट की कमी पर उच्च न्यायालय ने प्रशासन को चेताया
Amar Ujala•

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