Study in US:भारतीय छात्र जब अमेरिका पढ़ने जाते हैं, तो वो ज्यादातर उन कोर्सेज को चुनते हैं, जिनसे टेक सेक्टर में आसानी से जॉब मिल जाए। तभी तो कंप्यूटर साइंस समेत टेक फील्ड में जॉब के लिए जरूरी ज्यादातर कोर्स भारतीयों के बीच पॉपुलर रहे हैं। मगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद से टेक सेक्टर अपनी चमक खो रहा है। जहां पहले फ्रेश ग्रेजुएट्स को भी मोटी सैलरी वाली जॉब मिल जाती थी, अब उन्हें नौकरियों के लिए दर-दर भटकने लगा है। कंप्यूटर साइंस, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसे कोर्स अब अपनी पॉपुलैरिटी गंवा रहे हैं।USCIS को कोर्ट का बड़ा झटका: ग्रीन कार्ड applications में अनिश्चित देरी को गैरकानूनी बतायाफेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की एक स्टडी में बताया गया किकंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट्सके बीच बेरोजगारी दर 6.1% से 7.5% के बीच है। AI आने के बाद टेक सेक्टर में लाखों की संख्या में छंटनी हुई है। गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट समेत हर कंपनी ने लोगों को नौकरियों से निकाला है। पहले जहां एंट्री-लेवल की जॉब्स पर नए ग्रेजुएट्स को रखा जाता था, वहीं अब उनकी जगह सिर्फ AI से ही काम लिया जा रहा है। वीजा को लेकर भी बुरा हाल है। टेक सेक्टर में जॉब के लिए H-1B वीजा जरूरी होता है, जिसे पाना स्टूडेंट्स के लिए नामुमकिन हो चुका है, क्योंकि लॉटरी सिस्टम खत्म होने के बाद जिसकी ज्यादा सैलरी होगी, उसे वीजा देने में प्राथमिकता दी जाएगी।STEM कोर्सेज ने US में नहीं खोयी अपनी चमक: एक्सपर्टस्टडी अब्रॉड एक्सपर्ट रितिका गुप्ताका कहना है कि भारतीय छात्रों को अमेरिका में पढ़ने के दौरान स्पेशलाइजेशन पर जोर देना चाहिए, खासतौर पर AI, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसी फील्ड में। उनका मानना है कि अमेरिका में अभी भी 'साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स' (STEM) कोर्सेज की पढ़ाई की जा सकती है, क्योंकि इनमें अभी भी स्कोप है। रितिका गुप्ता के मुताबिक, हाई-टेक इंडस्ट्री में सफल होने का फॉर्मूला स्किल होना है। उन्होंने उन फील्ड्स के बारे में भी बताया है, जहां अभीवर्क वीजापाना ज्यादा मुश्किल नहीं है।US में किस तरह के कोर्स चुनें भारतीय छात्र? एक्सपर्ट से जानेंअमेरिकी स्टूडेंट वीजा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में नौकरियों की लगातार कटौती की वजह से, अमेरिका में पढ़ने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों के लिए स्कूल चुनने के तरीके और उनके लंबे समय के लक्ष्यों में बड़े बदलाव आए हैं।जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था रीपीट मोड वाले कामों (वही काम जो प्रोग्रामर और सपोर्ट टीमें संभालती हैं) के लिए ऑटोमेटेड समाधानों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे कंप्यूटर साइंस जैसे सामान्य कोर्सेज पढ़ने वाले छात्रों के लिए जोखिम बढ़ गया है। अगर स्टूडेंट AI, साइबर सिक्योरिटी, डेटा इंजीनियरिंग या सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी जैसी खास फील्ड में विशेषज्ञता (एक्सपर्टीज) हासिल नहीं करते हैं, तो वे अमेरिकी कंपनियों के पास नौकरी के लिए आवेदन करते समय पिछड़ सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि STEM करियर की पॉपुलैरिटी या महत्व कम हो गया है, बल्कि यह संकेत देता है कि उन विदेशी ग्रेजुएट्स के लिए कॉम्पिटिशन और अवसर बढ़ गए हैं, जिनके पास हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी स्किल हैं और जो नौकरी के जरिए वीजा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।साथ ही, कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां वर्क वीजा मिलना आसान है (जैसे कि पब्लिक हेल्थ, हेल्थ केयर, फाइनेंस, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, आदि)। इनकी पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ेगी क्योंकि इन क्षेत्रों में मांग हमेशा बनी रहती है और यहां नौकरियां मिलना तुलनात्मक रूप से आसान और स्थिर होता है। अमेरिका विदेशी छात्रों के लिए कई अवसर प्रदान करना जारी रखे हुए है। हालांकि, उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि छात्र अपने कोर्स की फील्ड को कितनी समझदारी और रणनीतिक तरीके से चुनते हैं। छात्रों को ऐसे प्रासंगिक कोर्सेज पर फोकस करना चाहिए जो तेजी से बढ़ते ग्लोबल जॉब मार्केट्स के लिए उनके स्किल को तैयार करें, न कि इस बात पर कि पारंपरिक शिक्षा का इस्तेमाल नौकरी पाने के लिए कैसे किया जाता रहा है।रितिका गुप्ता (CEO और काउंसलर, AAera Consultants)कुल मिलाकर एक्सपर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर आप अपने लिए सही कोर्स और फील्ड चुनते हैं और स्किल हासिल करने पर फोकस करते हैं, तो अभी अमेरिका में कामयाब होने की गुंजाइश है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी है कि वो सिर्फ पारंपरिक कोर्स जैसे कंप्यूटर साइंस पर फोकस ना करें, बल्कि उसके साथ स्पेशलाइजेशन करने पर जोर दें, तभी कामयाबी हासिल हो पाएगी।
अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों का ध्यान तकनीक से हट गया क्योंकि ए. आई. युग सामने आ रहा है
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