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अमेरिकी मीडिया संगठनों ने व्हाइट हाउस प्रेस प्रतिबंध को लेकर ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर किया

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अमेरिकी मीडिया संगठनों ने व्हाइट हाउस प्रेस प्रतिबंध को लेकर ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर किया
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अमेरिका के तीन मीडिया संस्थानों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन के कई टॉप अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. संस्थानों का आरोप है कि अधिकारियों ने इन तीनों संस्थानों के पत्रकारों के व्हाइट हाउस में घुसने पर रोक लगाकर नजरिए के आधार पर भेदभाव किया है, जो अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन का सीधा उल्लंघन है. तीनों मीडिया संस्थानों ने सोमवार (21 सितंबर, 2026) को वाशिंगटन डीसी की एक फेडरल कोर्ट के जज से व्हाइट हाउस के प्रतिबंध पर तुरंत रोक लगाने और प्रभावित पत्रकारों के प्रेस क्रेडेंशियल और व्हाइट हाउस में एक्सेस को फिर से बहाल करने की मांग की. दरअसल, तीनों संस्थानों के पत्रकारों ने शनिवार (19 सितंबर, 2026) को व्हाइट हाउस में घुसने की कोशिश की थी, लेकिन वहां उनके प्रेस बैज जब्त कर लिए गए थे. मुकदमे में कहा गया, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने CNN, MS NOW और POLITICO और इन समाचार संस्थानों के लिए खबरें कवर करने वाले इंडिविजुअल रिपोर्टरों पर बैन लगा दिया, जो प्रथम संशोधन और ड्यू प्रोसेस क्लॉज की सबसे बेसिक गारंटियों की अनदेखी है.’ इसमें आरोप लगाया गया कि बैन लगाने का मकसद इन संस्थानों की पिछली खबरों के लिए उन्हें सजा देना था, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन खबरों को नेगेटिव माना और भविष्य में उनके और उनके प्रशासन की नीतियों और कार्रवाइयों से जुड़ी रिपोर्टिंग को प्रभावित करना चाहा. इसके अलावा, शिकायत में यह भी कहा गया कि यह बैन प्रथम संशोधन पर सीधा हमला और अमेरिकी संविधान के मूल सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन है. MS NOW, CNN और Politico की तरफ से दर्ज किया गया यह केस शुक्रवार (18 सितंबर, 2026) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा के बाद की गई पहली औपचारिक कानूनी कार्रवाई है, जिसमें उन्होंने तीनों समाचार संस्थानों को व्हाइट हाउस से बैन करने की बात कही थी. ट्रंप ने इसके लिए ऐसी खबरों का हवाला दिया था, जिन्हें वह अपने लिए गलत मानते हैं. यह विवाद अमेरिका के ट्रंप प्रशासन और न्यूज मीडिया के बीच चल रहे व्यापक टकराव को और बढ़ाता है. इस मामले में तीनों न्यूज संस्थानों ने सोमवार (21 सितंबर, 2026) को संयुक्त बयान जारी कर किए गए मुकदमे की घोषणा की. बयान में कहा गया, ‘आज सुबह में हमने सरकार को सूचित किया है कि हम अपने प्रथम संशोधन के तहत मिले अधिकारों की रक्षा और इस सिद्धांत को बरकरार रखने के लिए मुकदमा दाखिल कर रहे हैं कि सरकार यह तय नहीं करती है कि प्रेस क्या रिपोर्ट करेगा या अखबार में छापेगा.’ संस्थानों ने आगे कहा, ‘बिना किसी पूर्व सूचना या किसी भी सही प्रक्रिया के व्हाइट हाउस ने उनकी रिपोर्टिंग पर आपत्ति जताते हुए उनके रिपोर्टरों के क्रेडेंशियल कैंसिल कर दिए. अगर इसे चुनौती नहीं दी गई तो इससे प्रेस की आजादी और सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त स्वतंत्र पत्रकारिता के जनता के अधिकार को खतरा हो सकता है.’ पिछले करीब पांच सालों से भारतीय मीडिया का हिस्सा हैं. अक्टूबर, 2024 से एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं. प्रिंट मीडिया के साथ अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत की है और आज डिजिटल मीडिया में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर लेखन कार्य कर रहे हैं. साल 2020 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की. क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, चुनाव और सामाजिक विषयों पर खबरें लिखते रहे हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश है. स्केचिंग, पेटिंग, फिल्में देखना, शायरी-कविताएं लिखना और घूमना बहुत ज्यादा पसंद है.

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Publisher: ABP News

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