H-1B Visa Fees Waiver:अमेरिका में जब से H-1B वीजा की 1 लाख डॉलर वाली नई फीस का ऐलान हुआ है, तब से ही टेक, फाइनेंस समेत हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियां परेशान हैं। उनके लिए विदेशी वर्कर्स को हायर करना महंगा हो चुका है। इसी बीच अमेरिका में मंगलवार को सदन में एक द्विदलीय बिल पेश किया गया। इसमें डॉक्टर और नर्स समेत विदेशी हेल्थकेयर वर्कर्स को H-1B पर हायर करने के लिए 1 लाख डॉलर की जो फीस देनी है, उससे छूट देने की मांग की गई है।H-1B Visa Fees बढ़ोतरी: US Court Ruling और Legal Challenge का Impact समझेंराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सितंबर मेंH-1Bकी नई फीस का ऐलान किया। इस वजह से उन अस्पतालों से लिए हायरिंग महंगी हो चुकी है, जो विदेशी हेल्थकेयर वर्कर्स को नौकरी देते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, विदेशी मेडिकल रेजिडेंट भी H-1B पर ही आते हैं, उन्हें लाना भी महंगा हो चुका है। आमतौर पर अमेरिका के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्थानीय डॉक्टर्स काम करने से बचते हैं। ऐसे में ज्यादातर विदेशी डॉक्टर्स यहां मरीजों का इलाज करते हैं। ये इलाके विदेशी डॉक्टर्स पर काफी निर्भर हैं।ट्रंप के खिलाफ पक्ष-विपक्षन्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 'अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन' (AMA) के अधिकारियों ने द्विदलीय बिल का स्वागत किया है। द्विदलीय बिल का मतलब है कि इसे ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों का समर्थन मिला है। एक तरह से ट्रंप के फीस वाले फैसले के खिलाफ पक्ष-विपक्ष दोनों साथ आ गए हैं। बिल को माइक लॉलर, सैनफर्ड डी बिशप, मारिया एल्विरा सालाजार और येवेट क्लार्क जैसे सांसदों ने स्पांसर किया है।AMA के अध्यक्ष डॉ. बॉबी मुक्कामाला ने कहा, 'मैं फ्लिंट,मिशिगनमें रहता हूं, जो मेडिकल सेवाओं के मामले में काफी पिछड़ा हुआ इलाका है। यहां लोग विदेशी डॉक्टर्स के भरोसे हैं। अगर ये (फीस) फिक्स नहीं होता है, तो इसकी वजह से मेरे शहर और अन्य ग्रामीण इलाकों के पास अपने लोगों का इलाज करने के लिए पर्याप्त डॉक्टर्स नहीं होंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'इनमें से ज्यादातर इलाकों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि यहां रहने वाले मरीज जरूरत पड़ने पर डॉक्टर्स को दिखा सकें।' AMA ने गुजारिश की है कि कांग्रेस इस पर जल्दी फैसला ले।भारतीयों को बिल पास होने से होगा फायदाAMA के मुताबिक, अमेरिका को 2036 तक 86 हजार डॉक्टरों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। भारत अमेरिका में विदेशी डॉक्टर्स का सबसे बड़ा सोर्स है। नर्स के मामले में भी वो दूसरा सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है। इंडिया हाउस फाउंडेशन के मुताबिक, अमेरिका में 25 फीसदी डॉक्टर्स विदेशी हैं, जिसमें से लगभग 60 हजार भारत से हैं। इसी तरह से विदेशी नर्सों की संख्या 5.50 लाख के आसपास है, जिसमें से भारत की 32 हजार नर्सें भी शामिल हैं।इस तरह अगर ये बिल पास हो जाता है, तो फिर भारतीय डॉक्टर्स और नर्सों के लिए अमेरिका में जॉब पाना आसान हो सकता है। इसका फायदा उन MBBS स्टूडेंट्स को भी मिलेगा, जो अमेरिका में रेजिडेंसी करना चाहते हैं। इसके अलावा अगर किसी को नर्स की जॉब चाहिए, तो उनके लिए भी अमेरिका में दरवाजे खुल जाएंगे। H-1B वीजा की फीस की वजह से नर्सों की भी बड़े पैमाने पर कमी हो गई है। भारतीय नर्सें इस कमी को पूरा कर सकते हैं।
अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा और तकनीकी कंपनियों ने 100,000 डॉलर के एच-1बी वीजा शुल्क का विरोध किया
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