आगरा जिले की आगरा ग्रामीण सीट यूपी की हॉट सीटों में शुमार है। आगरा ग्रामीण सीट, फतेहपुर सीकरी लोकसभा का हिस्सा है और 2008 में परिसीमन के बाद वजूद में आई। आगरा ग्रामीण सीट की विधानसभा क्षेत्र संख्या 90 है और यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। आगरा ग्रामीण सीट पर पहली जीत BSP को मिली थी और उसके बाद से लगातार दो बार से BJP को बंपर जीत मिल रही है। आगरा ग्रामीण सीट से विधायक बेबी रानी मौर्य यूपी में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके पास महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग है। 2027 के चुनाव में आगरा ग्रामीण सीट पर बीजेपी के सामने जीत की हैट्रिक लगाने का मौका है, जबकि सपा यहां अभी तक पहली जीत की तलाश में है। जानिए आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट का सियासी इतिहास क्या है और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में आगरा ग्रामीण सीट पर क्या राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। 2008 में परिसीमन के बाद आगरा ग्रामीण सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 2012 में हुआ था। इस चुनाव में बीएसपी के काली चरण सुमन के सामने चुनौती देने के लिए थीं सपा की हेमलता दिवाकर, कांग्रेस के उपेंद्र सिंह और बीजेपी के ओमप्रकाश चलनीवाले खटीक। काली चरण सुमन ने यह चुनाव 18,846 वोटों के अंतर से जीत लिया था। बीएसपी के काली चरण सुमन को 69,969 वोट मिले थे, जबकि सपा की हेमलता दिवाकर 51,123 वोट हासिल कर पाई थीं। आगरा ग्रामीण सीट पर हुए 3 आम विधानसभा चुनावों में यह सबसे कम अंतर की जीत थी। इस चुनाव में कांग्रेस और RLD का गठबंधन था। कांग्रेस के उपेंद्र सिंह 38,832 वोट पाकर तीसरे नंबर रहे थे। वहीं, बीजेपी के ओमप्रकाश चलनीवाले खटीक 22,750 वोट ही पा सके थे और बीजेपी को चौथे स्थान के साथ संतोष करना पड़ा था। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले सपा नेता और पिछले चुनाव की रनरअप हेमलता दिवाकर बीजेपी में शामिल हो गईं। बीजेपी ने उन्हें चुनाव में आगरा ग्रामीण सीट से प्रत्याशी भी बना दिया। हेमलता दिवाकर ने 2012 के चुनाव में 1,29,887 वोट पाकर बीएसपी के काली चरण सुमन को 65,296 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया था। काली चरण सुमन की पारी 64,591 वोटों पर सिमट गई थी। कांग्रेस के उपेंद्र सिंह इस बार भी तीसरे नंबर पर रहे थे और 31,312 वोट ही जुटा सके थे। इस चुनाव में कांग्रेस और सपा का गठबंधन था। इसके बावजूद, उपेंद्र सिंह रनरअप भी नहीं बन पाए थे। RLD ने इस बार अलग चुनाव लड़ा था और उसके कैंडिडेट नारायण सिंह सुमन को 17,446 वोट मिले थे। 2022 में बीजेपी ने नया दांव चला और हेमलता दिवाकर का टिकट काटकर उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेब रानी मौर्य को उम्मीदवार बना दिया। प्रत्याशी बदलने की बीजेपी की चाल कामयाब रही और वह पहले से भी बड़े अंतर से चुनाव जीती। बेबी रानी मौर्य ने 1,37,310 वोट हासिल किए, जबकि बीएसपी प्रत्याशी किरण प्रभा केसरी 60,702 वोटों पर ही सिमट गईं। बेबी रानी मौर्य ने यह चुनाव 76,608 वोटों के अंतर से जीत लिया था। इस चुनाव में RLD और सपा का गठंबधन था। सपा ने यह सीट RLD के लिए छोड़ दी थी। लेकिन यह दांव काम नहीं किया और गठबंधन की तरफ से उतरे RLD के उम्मीदवार महेश कुमार 52,731 वोट ही पा सके। वह तीसरे स्थान पर रहे थे। आगरा ग्रामीण सीट के सामाजिक समीकरण की बात करें तो यहां SC वर्ग के मतदाताओं का प्रभुत्व है। इसमें भी जाटव समाज के लोग ज्यादा डॉमिनेंट हैं। इसके अलावा, आगरा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में जाट और लोधी वोटर भी निर्णायक संख्या में हैं। साथ ही, ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य और मुस्लिम मतदाताओं की गोलबंदी करना भी यहां प्रत्याशियों व पार्टियों के लिए अहम होता है। 2027 के विधानसभा चुनाव में एक पाले में बीजेपी और RLD एक साथ हो सकते हैं और दूसरे पाले में सपा और कांग्रेस साथ में दिख सकते हैं। इसके अलावा, तीसरे प्लेयर के रूप में BSP का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि BSP पिछले दो चुनावों में रनरअप और 2012 के चुनाव में विजेता रही थी। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में आगरा ग्रामीण सीट पर उम्मीदवारों का चयन, जातीय गोलबंदी और गठबंधन की राजनीति नतीजे पर असर डाल सकती है।
आगरा ग्रामीण सीटः उत्तर प्रदेश के 2027 के विधानसभा चुनावों में एक महत्वपूर्ण लड़ाई का मैदान
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