पेट में गैस बनना, बार-बार डकार आना या पेट फूलना आम समस्याएं हैं. कई लोग इन्हें मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार ये खानपान, मानसिक तनाव और खराब लाइफस्टाइल से जुड़ी हो सकती हैं. गट यानी आंतों की सेहत सिर्फ खाना पचाने तक सीमित नहीं है. इसका संबंध शरीर के मेटाबॉलिज्म और इम्यून सिस्टम से भी है. ऐसे में पेट को स्वस्थ रखने के लिए खानपान के साथ रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है. ऐसे में पेट की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. इस बारे में नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के संस्थापक निदेशक प्रोफेसर डॉ. एस.के. सरीन ने बताया है. डॉ सरीन कहते हैं कि डकार आना, पेट में भारीपन महसूस होना और पेट फूलना गैस से जुड़ी आम शिकायतें हैं. जल्दी-जल्दी खाना, खाते समय बात करने से ज्यादा हवा निगली जा सकती है. इससे डकार और पेट फूलने की परेशानी बढ़ सकती है. मानसिक तनाव भी पेट की परेशानी को बढ़ा सकता है. चूंकि आंतों और दिमाग के बीच गहरा संबंध होता है. इसलिए मानसिक तनाव के दौरान कुछ लोगों को पेट में ऐंठन, भारीपन या गैस ज्यादा महसूस हो सकती है. डॉ.सरीन का कहना है कि अच्छी गट हेल्थ के लिए आप घर का खाना खाएं. घर के बने ताजा खाना खाएं. नाश्ते में फल शामिल करें. बिना चीनी वाली छाछ भी डाइट का हिस्सा हो सकती है, बशर्ते वह आपको सूट करे. बाहर के तले-भुने और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को न खाएं, रोजाना एक जैसा खाना खाने के बजाय फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों को अपनी डाइट में शामिल करें. डॉक्टर ने दिन में एक बार भोजन करने यानी 'वन मील ए डे' की सलाह भी दी. हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए जरूरी या बेहतर तरीका नहीं है, खासकर डायबिटीज, दूसरी बीमारियों, कमजोरी या दवाएं लेने वाले लोगों को ऐसा डाइट पैटर्न अपनाने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए. डॉक्टर ने एक्सरसाइज और पसीना आने को भी सेहत के लिए फायदेमंद बताया. हालांकि, पसीने के जरिए शरीर के टॉक्सिन बाहर निकलने का दावा सही नहीं है. शरीर से टॉक्सिन निकालने का काम लिवर और किडनी करते हैंय. पसीने का का काम शरीर के तापपान को मेंटेन करना है.
आंतों के स्वास्थ्य के मामलेः पेट की गैस, फटना और पेट फूलना को समझना।
Aaj Tak•

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