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आयुर्वेद कार्यक्रम में हिमालय की जड़ी-बूटियों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया गया

Amar Ujala•
आयुर्वेद कार्यक्रम में हिमालय की जड़ी-बूटियों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया गया
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इस अवसर पर अतिथियों ने आयुर्वेद और जड़ी-बूटियों के महत्व तथा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में उनके उपयोग पर अपने विचार रखे। उन्होंने हिमालय की वनौषधियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि इनका वैज्ञानिक अध्ययन और औषधीय उपयोग बढ़ाना आवश्यक है।विज्ञापनकार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने पतंजलि योगपीठ और महिला समूहों की ओर से लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। इन स्टालों के माध्यम से आयुर्वेद, जड़ी-बूटी संरक्षण और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया। इससे पूर्व पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष एवं कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए।विज्ञापनअपने संबोधन में विशिष्ट अतिथियों ने कहा कि हिमालय पर्वत श्रृंखला, विशेषकर यमकेश्वर क्षेत्र, प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है। यहां अनेक दुर्लभ एवं बहुमूल्य जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनमें औषधीय गुणों की अपार संभावनाएं हैं। संजीवनी बूटी सहित विभिन्न वनौषधियों की पहचान, उपयोगिता और औषधीय महत्व को लेकर शोध कार्य किए जा रहे हैं।कहा कि हिमालय की जैव विविधता और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण और वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन समय की आवश्यकता है। जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में शोध तथा उनके औषधीय उपयोग को बढ़ावा देने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी विकसित होंगी।हेमंत द्विवेदी ने हर्बल वर्ल्ड हिमालय एवं धन्वंतरि धाम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन हिमालय की प्राकृतिक एवं औषधीय संपदा को नई पहचान दिलाने के साथ ही आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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Publisher: Amar Ujala

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