उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी को बड़ा झटका लगा है. राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने पद से इस्तीफा देते हुए पार्टी को भी अलविदा कह दिया है. उन्होंने जयंत चौधरी को लिखी चिट्ठी में कहा कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र आज खतरे में है. व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश, इन्हीं वैचारिक एवं नैतिक कारणों से मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं. आरएलडी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए रामाशीष राय ने जयंत चौधरी का आभार जताया. उन्होंने कहा, 'मैं राजनीति में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 1974-75 के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर जुड़ा था. उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं का क्षरण तथा शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे सवाल राष्ट्रीय चिंता के विषय थे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने "संपूर्ण क्रांति" का आह्वान करते हुए व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना देश के सामने रखा था, वह आज भी अधूरा प्रतीत होता है.' रामाशीष राय ने आरोप लगाया कि कि समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है. किसान अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्षरत है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा जनमानस में असंतोष को जन्म दे रही है. दुर्भाग्यवश आज सार्वजनिक जीवन में ऐसे लोग भी उच्च स्थानों पर हैं जो सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा दे रहे हैं. यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित—तीनों के लिए घातक है. -रामाशीष राय जेपी आंदोलन से जुड़े हुए थे. उनका राजनीतिक अनुभव दशकों का है. -वो पूर्वी यूपी से आते थे और इस लिहाज से आरएलडी को पूर्वांचल में मजबूत करने में अहम भू्मिका निभा सकते थे. -यूपी में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का ही इस्तीफा हो जाने से कार्यकारिणी ही भंग हो जाएगी. इसे दोबारा तैयार करने में समय बर्बाद होगा. -रामाशीष राय के अलग-अलग दलों के सीनियर लोगों से अच्छे संबंध थे, जो गठबंधन के समय बारगेन पावर को बढ़ाते हैं. - उनके पास संसदीय परंपरा का भी अनुभव है क्योंकि वह BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए यूपी विधान परिषद के सदस्य यानी MLC भी रह चुके हैं. रामाशीष राय पूर्वी यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र जीवन से की थी और बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे. रामाशीष लंबे समय तक बीजेपी युवा मोर्चा से भी जुड़ा रहे और युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने. बीजेपी के अलावा वो कांग्रेस की टिकट पर 2004 में लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, जिसमें उन्हें एक लाख से ज्यादा वोट मिले थे. रामाशीष राय को अटल-आडवाणी-जोशी गुट का माना जाता रहा है. वह यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह के भी करीबियों में गिने जाते थे. बीजेपी में रहते हुए वो 2019 के लोकसभा चुनाव में देवरिया सीट से टिकट चाहते थे. जब टिकट नहीं मिली तो उन्होंने बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ा. हालांकि उन्हें सिर्फ सात हजार वोट ही मिले थे. बाद में वो आरएलडी में शामिल हुए और 2022 में जयंत चौधरी ने उन्हें आरएलडी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया था.
आरएलडी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दिया इस्तीफा
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