इटावा में पुलिस और जीएसटी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है. इस मामले में करीब 7 करोड़ 3 लाख रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का मामला सामने आया है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. आरोपियों के पास से लैपटॉप, फर्जी जीएसटी इनवॉइस, ई बिल से जुड़े दस्तावेज और बिना नंबर प्लेट की कार बरामद की गई है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सहायक आयुक्त राज्य कर खंड 1 इटावा की लिखित तहरीर पर इस पूरे मामले की जांच शुरू की गई थी. जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी वास्तविक माल की खरीद बिक्री किए कागजी जीएसटी फर्में बनाकर फर्जी टैक्स इनवॉइस जारी करते थे. इन फर्मों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार कर सरकार को जीएसटी जमा किए बिना आगे पास ऑन कर दिया जाता था. इससे सरकारी राजस्व को करीब 7 करोड़ 3 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है. एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यह गिरोह कोतवाली, फ्रेंड्स कॉलोनी और जसवंतनगर थाना क्षेत्रों में सक्रिय था. फ्रेंड्स कॉलोनी क्षेत्र में एम एल बिल्डर्स और भारत बिल्डिंग मटेरियल नाम की फर्मों के जरिए बिना माल आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी की जाती थी. जसवंतनगर क्षेत्र में भोले भाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराया गया और करोड़ों रुपये का फर्जी टर्नओवर दिखाया गया. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान पहले नितिन गुप्ता पुत्र हरिओम गुप्ता निवासी दबग्रान थाना कोतवाली, जीशान पुत्र हारून निवासी मोहल्ला शाहकमर थाना कोतवाली और तरुण अग्रवाल पुत्र राकेश अग्रवाल निवासी कटरा सेवाकली थाना कोतवाली को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. इन तीनों की भूमिका फर्जी फर्मों के संचालन और आईटीसी पास ऑन करने में अहम पाई गई. आगे की कार्रवाई में कोतवाली पुलिस ने अंकित जौहरी पुत्र संजय जौहरी और शिवा जौहरी पुत्र नरेश जौहरी को गिरफ्तार किया. फ्रेंड्स कॉलोनी पुलिस ने अभिषेक कुमार शाक्य पुत्र विमलेश कुमार शाक्य और देवेश चन्द्र शाक्य पुत्र राजेश कुमार शाक्य को गिरफ्तार किया. वहीं जसवंतनगर पुलिस ने मोहम्मद आसिफ खान पुत्र अनीस खान को गिरफ्तार किया. एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि आरोपी GSTR 1 में अधिक बिक्री दिखाकर अवैध रूप से आईटीसी बनाते थे और इसे अलग अलग ठेकेदारों और व्यापारियों को पास ऑन करते थे. इसके बदले उन्हें करीब ढाई प्रतिशत कमीशन मिलता था. आरोपियों ने इसके लिए बैंक खाते, मोबाइल फोन, लैपटॉप और व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया. जांच में 50 से 60 फर्जी जीएसटी पंजीकृत फर्मों का पता चला है, जिनमें से कई का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है. अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है और जल्द और गिरफ्तारियां की जाएंगी.
इटावा पुलिस-जी. एस. टी. विभाग ने नकली जी. एस. टी. फर्म गिरोह का भंडाफोड़ किया, इनपुट टैक्स क्रेडिट में ₹7.3 करोड़ जब्त किए
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