यह एफआईआर नागपुर की फर्म एसके सेल्स कॉर्पोरेशन' की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इसमें अभिषेक चंद्र, आईएएस (त्रिपुरा कैडर) और उनके साथियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने धोखाधड़ी करके इस फर्म से लगभग 14.55 करोड़ रुपये की 'अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट' जमा करवाई। यह रकम सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच त्रिपुरा सरकार के मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से जुड़े कथित टेंडरों के नाम पर ली गई थी, जबकि असल में ऐसे कोई टेंडर कभी जारी ही नहीं किए गए थे।विज्ञापनभारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 61(2), 316, 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2) और 341(2) के तहत दर्ज ये अपराध—जिनमें आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, किसी और का रूप धरकर धोखा देना और जालसाजी शामिल हैं, पीएमएलए 2002 के तहत 'अनुसूचित अपराध' माने जाते हैं। इसके आधार पर, ईडी ने एक ईसीआईआर दर्ज की और पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू कर दी। जांच से पता चला है कि अभिषेक चंद्र, आईएएस (जो फिलहाल सस्पेंड चल रहे हैं) ने खुद को त्रिपुरा सरकार में टेंडर प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले अधिकारी के रूप में पेश किया। उन्होंने शिकायतकर्ता का परिचय उत्पल कुमार चौधरी से कराया और कहा कि भुगतान की प्रक्रिया देखने की जिम्मेदारी उसी की है।विज्ञापनईएमडी का भुगतान 'डायरेक्टोरेट ऑफ हायर एजुकेशन' के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए किया गया था। असल में, यह उत्पल कुमार चौधरी का एक निजी उपक्रम था, जिसका नाम किसी असली सरकारी विभाग से मिलता-जुलता रखा गया था ताकि लोगों को धोखा दिया जा सके। आरोप है कि इसके लिए फर्जी टेंडर नोटिस और वर्क ऑर्डर का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, फंड इकट्ठा करने के लिए कृष्णा चक्रवर्ती (जिनका प्रतिनिधित्व उनके पति सुदीप पॉल कर रहे थे) के साथ एक जॉइंट वेंचर बनाया गया। पीड़ितों का भरोसा बनाए रखने और उनसे और पैसे निकलवाने के लिए, कुछ खास मौकों पर उन्हें आंशिक 'रिफंड' भी दिए गए।फर्जी संस्थाओं के खातों में जमा की गई रकम को कथित तौर पर कुछ ही दिनों के भीतर और कुछ मामलों में तो 24 घंटे के भीतर ही कई शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के नेटवर्क के जरिए इधर-उधर घुमा दिया गया (लेयरिंग की गई)। इनमें से कई कंपनियां उत्पल कुमार चौधरी के घरेलू सहायकों और सहयोगियों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं। अपराध से हासिल इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। इनमें एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के फ्लैट और मुंबई के शिवाजी पार्क में एक रिहायशी संपत्ति शामिल है, जिन्हें अभिषेक चंद्र के परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदा गया था। इसके अलावा, इस पैसे का इस्तेमाल विदेश यात्राओं और महंगी विलासिता की वस्तुओं को खरीदने में भी किया गया। साथ ही, कोलकाता स्थित एक कथित हवाला नेटवर्क के जरिए भी पैसों का लेन-देन किया गया।ईडी पहले से ही उत्पल कुमार चौधरी और अन्य लोगों के खिलाफ ECIR/AGSZO/03/2025 के तहत जांच कर रही है। यह मामला पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में दर्ज पांच एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें इसी तरह की फर्जी संस्थाओं और तौर-तरीकों का इस्तेमाल करके कई लोगों को ठगा गया था। इस मामले में कुल 44 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी हुई है। इस केस में, 22.01.2026 को 'प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर' (अस्थायी संपत्ति कुर्की आदेश) नंबर 01/2026 और 31.07.2026 को नंबर 05/2026 जारी किए जा चुके हैं।आईएएस अधिकारी अभिषेक चंद्र और हवाला ऑपरेटरों के घरों के साथ-साथ, मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन के रास्ते) से जुड़ी कई कंपनियों/संस्थाओं के दफ्तरों में भी तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान, हवाला लेन-देन से जुड़े ढेरों दस्तावेज, महंगी संपत्तियों के विवरण और ऐसे अन्य सबूत मिले हैं, जो कॉरपोरेट संस्थाओं पर संदिग्ध नियंत्रण की ओर इशारा करते हैं। इन सबूतों को जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा, मौजूदा जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले कई आरोपियों के डिजिटल डिवाइस और रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं।
ईडी ने कथित धोखाधड़ी वाले निविदा घोटाले के लिए त्रिपुरा सरकार के अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की
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