ईडी ने दो एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। इनमें से एक एफआईआर तमिलनाडु पुलिस के 'स्टेट साइबर क्राइम कमांड सेंटर' ने दर्ज की थी, जबकि दूसरी एफआईआर तेलंगाना के साइबराबाद स्थित 'साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन' में दर्ज की गई थी। ये मामले 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) 2023/IPC और 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम' (IT Act) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे।विज्ञापनधोखाधड़ी के तरीके की बात करें तो, जालसाज पीड़ितों को निवेश योजनाओं, नौकरियों, शेयर बाजार में निवेश या अन्य ऑनलाइन तरीकों का झांसा देकर सोशल मीडिया या फोन के जरिए संपर्क करते थे। इसके बाद, पीड़ित जालसाजों द्वारा बताए गए 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' में पैसे ट्रांसफर कर देते थे। फिर, इस रकम को कई अन्य 'म्यूल अकाउंट्स' में छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया जाता था। अंत में, इस रकम का कुछ हिस्सा नकद निकाल लिया जाता था, जबकि बाकी हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में ट्रांसफर किया गया।विज्ञापनईडी की जांच के दौरान, तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में दर्ज 10 और एफआईआर का संबंध इसी नेटवर्क से पाया गया। इसके अलावा, इसी नेटवर्क से जुड़ी साइबर अपराध की 600 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं। सैकड़ों साइबर अपराधों और ऑनलाइन धोखाधड़ी से हासिल की गई 400 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम को आरोपियों ने 'म्यूल' बैंक खातों के नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर के जरिए इधर-उधर घुमाया और छिपाया गया।जांच में पता चला कि रोशन फियाज और अम्मार ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसा तरीका तैयार किया, जिससे अवैध रकम को 'म्यूल' खातों के जाल के जरिए इधर-उधर घुमाया जा सके और उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा सके। जांच से पता चला है कि रोशन फियाज इस नेटवर्क का मुख्य व्यक्ति था। उसने अपने नाम, अपनी पत्नी के नाम और अपने नियंत्रण वाली कई प्रोप्राइटरशिप या अन्य इकाइयों के नाम पर 'म्यूल' बैंक खातों की एक बड़ी श्रृंखला चला रखी थी। ऐसे 31 खातों में 300 करोड़ रुपये से अधिक के डेबिट और क्रेडिट ट्रांजेक्शन पाए गए। पीड़ितों से ठगी गई रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और क्रिप्टो वॉलेट्स का इस्तेमाल करके उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया गया।अम्मार भी इस नेटवर्क का एक अहम व्यक्ति था। वह रोशन फियाज को अलग-अलग लोगों और इकाइयों के 'म्यूल' बैंक खाते उपलब्ध कराता था। इसके साथ ही वह अकाउंट किट, नेट-बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और ईमेल भी देता था, ताकि क्रिप्टोकरेंसी खरीदने वालों से भारतीय रुपये प्राप्त किए जा सकें। इससे पहले, ईडी ने रोशन फियाज, अम्मार और उनसे जुड़ी इकाइयों के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी ली थी। इस दौरान 14.50 लाख रुपये नकद और 3.26 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई, साथ ही कई बैंक खातों में मौजूद लगभग 88.28 लाख रुपये की राशि को फ्रीज कर दिया गया। दोनों आरोपियों को चेन्नई की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
ईडी ने दो प्राथमिकियों के आधार पर साइबर अपराध मामले की जांच शुरू की
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