याचिका में कहा कि वह 27 फरवरी 2026 से न्यायिक हिरासत में है, उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है तथा अब उससे किसी प्रकार की हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है। जमानत प्रार्थना पत्र में कहा कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह जांच व मुकदमे में पूरा सहयोग करेगा। वहीं सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध गंभीर प्रकृति का है और जांच में एकत्र सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता दर्शाती है। हालांकि सीबीआई ने स्वीकार किया कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आगे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी जमानत का पात्र है। अदालत ने याचिकाकर्ता संजय कुमार को व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी को जमानत दी
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