उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने यह भी आदेश दिया है कि यदि स्कूल प्रबंधन निर्धारित समय में दस्तावेज प्रदान करने में असमर्थ रहता है, तो उसे इसी समय-सीमा के अंदर इसके पीछे के ठोस कारणों की विस्तृत जानकारी भी छात्र को देनी होगी।विज्ञापनये भी पढ़ें-मध्य प्रदेश: स्कूली वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भरा जा रहा, हाईकोर्ट ने ओवरलोडिंग पर प्रशासन को फटकाराविज्ञापनयह महत्वपूर्ण निर्देश न्यायालय के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ द्वारा आनंद कॉलोनी, बलदेवबाग निवासी छात्र शिवराज त्रिपाठी की ओर से प्रस्तुत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए गए। याचिका में छात्र ने स्कूल प्रबंधन के उदासीन रवैये को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने छात्र के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने का आदेश दिया। इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और विस्तृत सुनवाई के लिए अदालत ने 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता छात्र का पक्ष अधिवक्ता राजेश चंद और अधिवक्ता रोहित नानेपाग ने प्रभावी ढंग से रखा। वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि छात्र ने कक्षा सातवीं तथा आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद स्कूल प्रशासन से अपनी दोनों वर्षों की अंकसूचियों और स्थानांतरण प्रमाणपत्र की मांग की थी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने उसे आवश्यक दस्तावेज प्रदान नहीं किए।दस्तावेज न मिलने के कारण छात्र को विवश होकर न्याय के लिए न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। इसके अतिरिक्त याचिका में स्कूल की मान्यता और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से उसकी संबद्धता से जुड़े दस्तावेज पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रारंभिक पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने समयबद्ध निर्देश जारी कर दिए।
उच्च न्यायालय ने स्कूल प्रबंधन को दस्तावेज उपलब्ध कराने या देरी के बारे में स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया
Amar Ujala•

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