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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा को गठबंधन की पेशकश करते हैं असदुद्दीन औवैसी

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा को गठबंधन की पेशकश करते हैं असदुद्दीन औवैसी
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21 सितंबर 2026... AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) को गठबंधन का खुला ऑफर दिया. ओवैसी ने कहा कि जो भी दल BJP को सत्ता से बाहर रखना चाहता है, वह उनसे बात कर सकता है. ओवैसी ने चेतावनी भी दी कि अगर 'सम्मानजनक' सीट शेयरिंग नहीं हुई, तो AIMIM अकेले दम पर 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फौरन पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी '4-5 सीटें जीत सकते हैं, लेकिन BJP सरकार बनवाने में मदद करेंगे. उन 5 विधायकों का क्या करेंगे?' AIMIM के साथ गठबंधन करने पर कांग्रेस और SP दोनों को ही 5 बड़े सियासी नुकसान हो सकते हैं. सबसे बड़ा खतरा है कि AIMIM का गठबंधन विपक्षी वोटों को बांट सकता है और बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है... उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 125 से ज्यादा सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक है. इनमें करीब 70 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30% से ऊपर है. मुस्लिम आबादी राज्य में करीब 20% है. 2022 के UP विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 97 सीटों पर उम्मीदवार उतारे. पार्टी का कुल वोट शेयर सिर्फ 0.49% रहा, लेकिन इस छोटे से वोट शेयर ने SP के गणित को बिगाड़ दिया. कम से कम 7 सीटों पर AIMIM को मिले वोट, SP के हार के अंतर से ज्यादा थे. यानी AIMIM अकेले चुनाव लड़े तो SP का मुस्लिम वोट बंटेगा और BJP को सीटें मिलेंगी. अगर गठबंधन कर लिया तो भी नुकसान है- क्यों, वो अगले पॉइंट में. कांग्रेस के लिए ओवैसी सिर्फ एक छोटी पार्टी नहीं हैं. ओवैसी की पूरी राजनीति मुस्लिम हितों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिससे वे कांग्रेस और SP दोनों के लिए सीधे मुकाबले का चेहरा बन जाते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे इमरान मसूद से बात करते हुए 'हैदराबाद प्रॉब्लम' की चेतावनी देते दिख रहे थे. यानी कांग्रेस को डर है कि ओवैसी का असर UP में भी न आ जाए. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह UP में अपना मुस्लिम वोट बैंक खो चुकी है. 2022 में कांग्रेस का वोट शेयर सिर्फ 2.33% था, जबकि AIMIM का 0.49%. यानी कांग्रेस पहले से ही कमजोर है. अगर ओवैसी से गठबंधन किया, तो कांग्रेस अपनी बची-खुची मुस्लिम पहचान भी खो देगी. अगर नहीं किया, तो ओवैसी उसके वोट काटेंगे. SP की राजनीति मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर टिकी है. 2022 में SP और उसके सहयोगियों के 34 मुस्लिम विधायक जीते थे, जो 2017 से 10 ज्यादा थे. इसका मतलब है कि SP के लिए मुस्लिम वोट सिर्फ वोट नहीं, सीट जिताने वाला फैक्टर है. अगर अखिलेश ओवैसी से गठबंधन करते हैं, तो AIMIM को कुछ सीटें देनी पड़ेंगी. ओवैसी की पार्टी का संगठन UP में कमजोर भी है. वे सिर्फ मुस्लिम वोटों के दम पर 4-5 सीटें जीत सकते हैं, लेकिन बदले में SP को उन सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारने पड़ेंगे, यानी SP का अपना विस्तार रुक जाएगा. अगर गठबंधन नहीं होता और ओवैसी अकेले लड़ते हैं, तो SP का मुस्लिम वोट बंटेगा. 2022 में जिन 7 सीटों पर AIMIM ने SP को हरवाया, वहां फिर वही कहानी दोहरा सकती है. यह सबसे बड़ी रणनीतिक चिंता है. अगर कांग्रेस या SP ओवैसी के साथ गठबंधन करते हैं, तो BJP इसे 'मुस्लिम तुष्टिकरण' बताकर हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर सकती है. बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस के शकील अहमद खान ने खुद माना कि ओवैसी की 'सांप्रदायिक' भाषणबाजी ने हिंदू वोटों को एकजुट किया और महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया. शकील ने कहा कि ओवैसी की बयानबाजी ने 'हिंदू सांप्रदायिकतावादियों को हिंदू भावनाओं पर काम करने का मौका दिया.' बिहार के कदवा सीट से कांग्रेस के शकील अहमद खान 18,368 वोटों से हार गए. उन्होंने खुद कहा कि पहले उन्हें 25,000 हिंदू वोट मिलते थे, लेकिन इस बार हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से उनका समर्थन घट गया. साथ ही 15,000 मुस्लिम वोट AIMIM और निर्दलीय मुस्लिम उम्मीदवारों को चले गए. इसके अलावा कांग्रेस और SP नेता अक्सर ओवैसी को BJP की 'बी टीम' कहते हैं. अगर वे उनके साथ गठबंधन करते हैं, तो उनपर भरोसा खत्म हो जाएगा. बिहार में ओवैसी ने खुद कहा था कि उन्होंने महागठबंधन से 6 सीटें मांगी थीं, लेकिन नहीं मिलीं. यानी ओवैसी गठबंधन नहीं होने पर भी चुनाव लड़ेंगे और विपक्षी वोट काटेंगे. यह एक जैसी स्थिति है, यानी ऐसी विरोधाभासी स्थिति है जिससे बाहर निकलना नामुमकिन होता है, क्योंकि इसके नियम या शर्तें आपस में एक-दूसरे को काटती हैं. ओवैसी से गठबंधन किया तो BJP को ध्रुवीकरण का मौका मिलेगा. नहीं किया तो मुस्लिम वोट बंटेगा और BJP को सीटें मिलेंगी. अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं करेगी, ताकि उनके PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को नुकसान न पहुंचे. कांग्रेस भी ओवैसी से दूरी बनाए हुए है. अगर ओवैसी 2027 में 200 सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं, तो क्या कांग्रेस और SP उन सीटों पर अपना वोट बचा पाएंगे? 2022 के आंकड़े बताते हैं कि जवाब 'नहीं' है. AIMIM का 0.49% वोट शेयर भले छोटा दिखे, लेकिन जिन 7 सीटों पर उसने SP को हरवाया, वहां यही 0.49% निर्णायक साबित हुआ. ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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