योगी सरकार यूपी के शहरी क्षेत्रों में निर्माण के लिए भूमि उपयोग बदलने को लेकर आने वाली बाधाओं को दूर करने जा रही है। सरकार फीस में संशोधन करेगी। लगने वाले शुल्क की दरों को भी तर्कसंगत बनाया जाना है। इसके लिए देश के अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन कराया जाएगा और यह देखा जाएगा कि उनके यहां भूमि उपयोग की क्या व्यवस्था है। देश के जिस राज्य का मॉडल सबसे अच्छा होगा उसे अपनाते हुए नीति में संशोधन किया जाएगा। प्रदेश में भूमि के उपयोग के आधार पर नक्शा पास करने की व्यवस्था है। राज्य सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डालर करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए नीतियों में संशोधन किया जा रहा है, जिससे उद्योग लगाने के साथ ही रियल स्टेट सेक्टर और देश की नामचीन विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को भूमि उपलब्ध कराई जा रही है। शहरी क्षेत्रों में भूमि कम होती जा रही है। इसलिए भूमि का उपयोग बदलकर उस पर निर्माण कार्य की अनुमति दी जा रही है। मौजूदा समय भूमि उपयोग परिवर्तन में कठिनायां आ रही हैं। इसके चलते विकास प्राधिकरणों में आने वाले आवेदनों पर काफी समय तक विचार नहीं हो पा रहा है। शासन स्तर पर हुई बैठक में पाया गया कि इसके लिए मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के यहां प्रस्ताव भेजा जा रहा है और उस पर त्वरित फैसला नहीं हो पा रहा है। इसलिए भूमि उपयोग परिवर्तन के लंबित मामलों की समीक्षा तथा भू-उपयोग प्रक्रिया को सरलीकृत करने पर विचार-विमर्श किया गया। भूमि-उपयोग परिवर्तन के मामलों को विकास प्राधिकरण बोर्ड के माध्यम से भेजे जाने की अनिवार्यता का भी विधिक परीक्षण कराया जाएगा और देखा जाएगा क्या इसकी जरूरत है। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की दरों का अन्य राज्यों से तुलनात्मक अध्ययन किए जाएगा और इसे युक्तिसंगत बनाने पर विचार होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी निर्माण परियोजनाओं के लिए भूमि-उपयोग परिवर्तनों को सुव्यवस्थित किया
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