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उत्तराखंड के जिम मालिक ने उत्पीड़न मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की

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उत्तराखंड के जिम मालिक ने उत्पीड़न मामले में पुलिस की निष्क्रियता पर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की
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नैनीताल:उत्तराखंड के कोटद्वार के जिम मालिक दीपक कुमार की याचिका पर उत्तराखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के क्रम में हाई कोर्ट ने दीपक पर मामले को सनसनीखेज बनाने की बात कही। दरअसल, कोटद्वार में 28 जनवरी को बजरंग दल के लिए सदस्यों ने कथित तौर पर मुस्लिम दुकानदार को परेशान किया था। इस मामले में दीपक ने दखल दिया। बजरंग दल के सदस्यों के साथ वे भिड़ते दिखे। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे खुद को 'मोहम्मद दीपक' बताते दिखे थे। इस मामले में बजरंग दल के सदस्य की ओर से दीपक और उनके एक अन्य साथी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने, फोन छीनने और धमकी देने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई।दीपक ने इस मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने एफआईआर रद्द करने, सुरक्षा मांगने और उत्पीड़न के मामले में पुलिस की निष्क्रियता की जांच कराने की बात उठाई। मामले में हाई कोर्ट की ओर से जांच की स्थिति की रिपोर्ट मंगाई गई। साथ ही, वीडियो वायरल होने के बाद दीपक को मिले चंदे का विवरण मांगा गया। याचिका पर सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपी सुरक्षा की गुहार लगा रहा है? आप संदिग्ध हैं और मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रहे हैं।कोर्ट में चली सुनवाईउत्तराखंड हाई कोर्ट में दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें उन्होंने खुद के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। सुनवाई क्रम में दीपक के वकील ने कोर्ट में कहा कि मुझे लगातार धमकियां मिल रही हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप जांच के दायरे में हैं। इस पर वकील ने कहा कि वह एक अलग बात है। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप स्वीकार करते हैं कि आप जांच का सामना कर रहे हैं।कोर्ट ने कहा कि जांच अवधि के दौरान आपकी जान और स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए सभी कदम उठाना उनका कानूनी दायित्व है। इसलिए, एफआईआर के बाद सुरक्षा की गुहार लगाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। आपको पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भरोसा करना चाहिए। आप इन गुहारों के जरिए मामले को संवेदनशील (सनसनीखेज) बनाने की कोशिश कर रहे हैं।पुलिस पर बोझ का जिक्रहाई कोर्ट ने जांच प्रक्रिया की धीमी गति मामले में पुलिस पर बोझ का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी 3-4 केसों की जांच कर रही है। उन पर काम का बोझ देखिए। अब याचिका दायर करके आपने उन्हें किस स्थिति में डाल दिया है। कोर्ट ने कहा कि आप जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। जस्टिस राकेश थपलियाल ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दीपक कुमार की सुरक्षा की गुहार की मांग पर भी विचार किया।कोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष दर्ज किया गया कि दीपक कुमार की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि कोई ऐसा व्यक्ति, जो किसी एफआईआर में संदिग्ध आरोपी है, वह पर्याप्त सुरक्षा की गुहार कैसे लगा सकता है? कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस उसकी सुरक्षा करने में सक्षम है।विभागीय जांच की मांग पर भी सवालहाई कोर्ट ने दीपक कुमार की ओर से जांच प्रक्रिया में पक्षपात के मामले पर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि कथित पक्षपातपूर्ण जांच के लिए पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच की गुहार लगाना, जांच एजेंसी पर दबाव बनाने की एक चाल है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की गुहार लगाने के लिए कुछ ठोस आधार होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की राहत की गुहार लगाना लंबित एफआईआर में चल रही जांच को किसी भी तरह से प्रभावित करने के अलावा और कुछ नहीं है।दीपक कुमार के वकील ने कोर्ट में कहा कि मेरे मुवक्किल को भी यह नहीं पता कि उनकी शिकायतों पर ये एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि काहे को परेशान हो रहे हो? आप मेरा आदेश समझिए। वे जांच कर रहे हैं। आपने सीधे सेक्रेटरी से जांच करने को कहा है। इस पर वकील ने कहा कि मैं कुछ बातों की पुष्टि करना चाहता हूं।शुक्रवार तक सुनवाई टलीहाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के क्रम में साफ किया कि यह हमारी टिप्पणी है। हो सकता है इस मामले में मैं गलत होऊं। इसके बाद कोर्ट ने मामले को शुक्रवार तक के लिए टाल दिया। वहीं, अगले मामले में एक अलग याचिकाकर्ता से कोर्ट ने पूछा कि भाई, तुम्हारा दर्द क्या है? तुमने किस भरण-पोषण (मेंटनेंस) के आदेश को चुनौती दी है?

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