उत्तराखंड के समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने योजनाओं में गडबड़ी के अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के आरोपों से आहत होकर बड़ा बयान दिया है. मंत्री खजान दास ने कहा कि अगर उन पर लगे कमीशनखोरी या भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं तो वे न केवल मंत्री पद से इस्तीफा देंगे, बल्कि आत्महत्या जैसा कदम भी उठा सकते हैं. फिलहाल मंत्री के बयान से उत्तराखंड का सियासी पारा चढ़ गया है. दरअसल, बीती 11 सितंबर को समाज कल्याण विभाग ने अनुसूचित जाति उप योजना और जनजाति उप योजना के तहत चकराता क्षेत्र के लिए करीब 9 से 12 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सूची जारी की थी. सूची सामने आते ही स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है. इसी के चलते भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने रविवार को मंत्री खजान दास के आवास का घेराव कर अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं के आरोपों पर सफाई देते हुए मंत्री खजान दास ने कहा कि पूरे प्रदेश में बजट का वितरण बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के किया गया है. चकराता को बाकी क्षेत्रों के मुकाबले सबसे अधिक हिस्सा मिला है. उनका कहना था कि सारे फैसले विभाग को प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर लिए गए हैं, न कि किसी एक क्षेत्र या व्यक्ति विशेष के दबाव में. वहीं इस घटना से आहत मंत्री खजान दास ने मीडिया के सामने भावुक होकर कहा कि अगर उन पर लगे कमीशनखोरी या भ्रष्टाचार के आरोप सही साबित हुए तो वह न केवल मंत्री पद से इस्तीफा देंगे, बल्कि आत्महत्या जैसा कदम भी उठा सकते हैं. मंत्री के इस बयान ने विवाद को और गरमा दिया है. वहीं, बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने CM हाउस में भाजपा कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की. बैठक में तय हुआ कि इस पूरे प्रकरण की जांच संबंधित विभाग के अधिकारियों से कराई जाएगी. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि वे खुद जांच रिपोर्ट मंगाकर उचित कार्रवाई करेंगे. हालांकि इस दौरान मुख्यमंत्री ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि किसी भी धरना प्रदर्शन से पहले उनसे बात की जानी चाहिए थी. चकराता विधानसभा सीट पर भाजपा का प्रदर्शन कांग्रेस के मुकाबले लगातार कमजोर रहा है. 2017 में मधु चौहान ने कांग्रेस के प्रीतम सिंह को कड़ी टक्कर दी थी और मात्र 1,543 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि 2022 में भाजपा प्रत्याशी रामशरण नौटियाल यह सीट 9,436 वोटों के भारी अंतर से गंवा बैठे. ऐसे में पार्टी के भीतर उठे इस विवाद को चकराता में आगामी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है. आलोक सेमवाल उत्तराखंड के देहरादून की खबरों पर नजर रखते हैं. एबीपी लाइव के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन BA hons मास कम्यूनिकेशन HNB गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की हैं.
उत्तराखंड के मंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच इस्तीफे और आत्महत्या की धमकी दी
ABP News•

Full News
Share:
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: ABP News
Want to join the conversation?
Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.