मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है. अब लोग अपनी हाइट भी सर्जरी से बढ़वा रहे हैं. हालांकि,विशेषज्ञों का कहना है कि कद बढ़ाने की सर्जरी कोई नॉर्मल प्रोसीजर नहीं है. इसमें कई तरह के रिस्क हैं और मरीज को लंबे समय तक सावधानी बरतने की जरूरत होती है, लेकिन फिर भी अच्छा दिखने की चाहत और कद को बढ़ा हुआ दिखाने के लिए लोग सर्जरी करा रहे हैं. जिसमें हड्डियों को काटना भी पड़ रहा है. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि हाइट बढ़ाने वाली सर्जरी कराना कितना सेफ है. दिल्ली के जेएमसी हॉस्पिटल में हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) राजेश भल्ला ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि कद बढ़ाने की सर्जरी में हड्डियों की लंबाई बढ़ाई जाती है. इसके लिए इलिजारोव तकनीक का इस्तेमाल होता है. शुरुआत में इसका इस्तेमाल उन मरीजों के इलाज में किया जाता था, जिनकी हड्डियां फ्रैक्चर के बाद सही तरीके से नहीं जुड़ती थीं या जिनके पैरों की लंबाई में अंतर होता था. लेकिन अब लोग हाइट बढ़ाने के लिए भी इस सर्जरी को करा रहे हैं. डॉ. भल्ला बताते हैं कि इस सर्जरी में सबसे पहले हड्डी को काटकर उसके दो हिस्से किए जाते हैं. इसके बाद एक विशेष उपकरण लगाया जाता है, जिसकी मदद से दोनों हिस्सों के बीच धीरे-धीरे दूरी बढ़ाई जाती है. यह दूरी रोजाना करीब एक मिलीमीटर बढ़ाई जाती है. जैसे-जैसे हड्डी के दोनों हिस्से दूर होते हैं, उनके बीच खाली जगह में शरीर खुद नई हड्डी बनाने लगता है. साथ ही आसपास की नसों, मांसपेशियों और दूसरे टिश्यू को भी इस बढ़ती लंबाई के अनुसार ढलने का समय मिलता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की टांग की हड्डी की लंबाई 5 सेंटीमीटर बढ़ानी है, तो इसे रोजाना थोड़ा-थोड़ा बढ़ाकर पूरा करने में करीब 50 दिन लग सकते हैं, लेकिन इतने में इलाज पूरा नहीं होता. इसके बाद नई बनी हड्डी को मजबूत होने के लिए करीब 100 दिन या इससे ज्यादा समय देना पड़ता है. यानी 5 सेंटीमीटर लंबाई बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है. हालांकि, यह समय मरीज की उम्र, हड्डियों की स्थिति और शरीर की रिकवरी पर निर्भर करता है. डॉ. भल्ला के अनुसार, कुछ चुनिंदा मामलों में जांघ की हड्डी को लगभग 7.5 से 8 सेंटीमीटर और पिंडली की हड्डी को करीब 5 से 6 सेंटीमीटर तक लंबा करने का भी प्लान किया जाता है. दोनों हड्डियों में अलग-अलग चरणों में सर्जरी करके कुल 12 से 15 सेंटीमीटर तक लंबाई बढ़ाने की संभावना भी हो सकती है. हालांकि, इसे हर मरीज के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता है. इसमें जोड़ों में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव, हड्डी के जुड़ने में देरी और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं. डॉ. भल्ला बताते हैं कि सर्जरी से पहले यह समझना जरूरी है कि मरीज आखिर अपनी लंबाई क्यों बढ़ाना चाहता है. क्या यह उसका अपना फैसला है या वह किसी दूसरे व्यक्ति के दबाव में ऐसा कर रहा है? इसके साथ ही मरीज की हड्डियों की मजबूती, मानसिक स्थिति की जांच भी होनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ की मदद ली जानी चाहिए.
ऊंचाई बढ़ाने वाली सर्जरीः बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद एक जोखिम भरी प्रक्रिया
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