टेक्नोलॉजी एक तरफ जहां लोगों की लाइफ आसान बना रही है, वहीं दुसरी तरफ अब एक नई चिंता भी सामने आ रही है. क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आज के समय में लोगों का ऐसा अटूट भरोसा हो गया है कि अब वह चिंता का विषय बनता जा रहा है. ऐसे में अगर आप भी अपने हर एक सवाल के लिए AI चैटबॉट पर निर्भर हो गए हैं, तो थोड़ा संभल जाइए. एंथ्रोपिक (Anthropic) की एक नई स्टडी ने इसको लेकर पूरी दुनिया को आगाह किया है. उनका कहना है कि आज के समय में लोग एआई की सलाह को बिना किसी सवाल या जांच के सच मान रहे हैं. ऐसे में AI अगर गलत जानकारी भी दे रहा है, तो इंसान उसे पकड़ने के बजाय उसी रास्ते पर चल दे रहा है. यह लोगों के लिए बेहद डरावना होता जा रहा है. मशीन के आगे फेल हुआ इंसानी दिमाग?एंथ्रोपिक के रिसर्चर्स ने यह जानने के लिए एक रिसर्च की कि इंसान और AI के बीच का रिश्ता कैसा है. स्टडी में पाया गया कि जब भी लोगों को कोई कठिन काम दिया गया या कोई सलाह मांगी गई, तो उन्होंने एआई के जवाब को ही 'अंतिम सत्य' मान लिया. इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि एक्सपर्ट्स ने भी कई बार AI के गलत जवाब की कोई काट नहीं दी. स्टडी के अनुसार, एआई चैटबॉट्स की भाषा इतनी आत्मविश्वास से भरी और लुभावनी होती है कि यूजर को लगता ही नहीं कि यह गलत हो सकता है. इसे टेक्निकल भाषा में 'Automated Bias' कहा जा रहा है. इसके अनुसार इंसान धीरे-धीरे खुद सोचने के बजाय मशीन की बात को सही मानने लगता है. ऐसा खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा देखा गया जो पहले से तनाव, अकेलेपन या किसी निजी परेशानी से गुजर रहे थे. यह भी पढ़ें:-बिजली बिल से चाहिए 70% छुटकारा? वैज्ञानिकों ने रेत से बना डाली ऐसी बैटरी, जो कोयले.. ऐसा क्यों हो रहा है?रिसर्चर्स का मानना है कि इसके पीछे मुख्य वजह एआई का बातूनी अंदाज है. एआई केवल डेटा नहीं देता, बल्कि वह बड़े प्यार और तर्क के साथ अपनी बात रखता है. ऐसे में लोग इसकी गलती पकड़ नहीं पाते हैं. कई बार जब AI लगातार सही स्पेलिंग या छोटे-मोटे गणित हल करता है, तो इंसान का दिमाग उस पर भरोसा करना शुरू कर देता है. लोग अब गूगल सर्च करके चार अलग-अलग वेबसाइट पढ़ने के बजाय एआई से एक सारा जवाब एक ही जगह लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इससे हमारी सोचने और परखने की शक्ति कम हो रही है. क्या है इसके खतरे?एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में इसको लेकर चेतावनी दी गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि AI पर यह अंधा विश्वास लोगों आगे चल कर बहुत भारी पड़ने वाला है. अगर एआई ने किसी गंभीर बीमारी या कानूनी मामले में गलत सलाह दे दी, तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं. AI को इस तरह से प्रोग्राम किया जा सकता है कि वह धीरे-धीरे आपकी सोच बदल दे और आपको पता भी न चले. यह स्थिती आपके लिए बहुत डेंजर हो सकती है. AI के कहने पर चलने से आपमें जिम्मेदारी की कमी हो जाएगी. अप अपनी गलती नहीं देख पाएंगे. सावधानी ही बचाव हैएक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई एक शानदार 'असिस्टेंट' हो सकता है. लेकिन इसको आप अपना 'बॉस' नहीं बनने दें. किसी भी बड़े फैसले से पहले एआई के जवाब को क्रॉस-चेक करना बहुत जरूरी है. याद रखें, एआई सिर्फ पिछला डेटा देख सकता है, उसके पास इंसानी संवेदनाएं और वर्तमान का विवेक नहीं है. इसलिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मदद के लिए करें, अपने दिमाग की जगह देने के लिए नहीं. यह भी पढ़ें:-Sam Altman को क्यों आया खुद पर रोना? नया AI ऐप लॉन्च करते ही बोले- मैं तो फालतू...
ए. आई. में अंध विश्वासः मनुष्य बिना सवाल किए या जाँच किए सलाह स्वीकार कर रहे हैं
Zee News Hindi•
&w=3840&q=75)
Full News
Share:
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: Zee News Hindi
Want to join the conversation?
Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.