अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का ऐतिहासिक यूनियन हॉल इन दिनों फिर से छात्र राजनीति के नारों, तालियों और बहसों से गूंज उठा है. 8 साल के लंबे अरसे बाद आयोजित हो रहे छात्र संघ चुनाव (AMUSU Election 2026-27) में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मोहम्मद नोमान अशरफ रातों रात सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाले चेहरे बन गए हैं. चुनाव की परंपरा के मुताबिक आयोजित 'प्रेसिडेंशियल स्पीच' या डिबेट के दौरान नोमान अशरफ ने जिस बेबाकी, आक्रामकता और अंदाज के साथ अपनी बात रखी, उसने कैंपस के छात्रों को काफी प्रभावित किया है. अब जब वोटिंग का समय करीब है, तो हर किसी की निगाहें चुनाव नतीजों और नोमान अशरफ के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं. एएमयू की आधिकारिक प्रत्याशी सूची से मिली जानकारी के अनुसार मोहम्मद नोमान अशरफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में पीएच.डी. के तीसरे वर्ष के शोध छात्र हैं. वो AMUSU चुनाव 2026-27 में अध्यक्ष (प्रेसीडेंट) पद के लिए चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं. कैंपस राजनीति में नोमान को एक प्रखर वक्ता और छात्रों के अधिकारों के लिए मुखर होकर बोलने वाले शोधार्थी के रूप में देखा जाता है. यूनियन हॉल से दिए गए अपने अंतिम भाषण यानी प्रेसिडेंशियल स्पीच में नोमान अशरफ ने कैंपस के बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. आइए जानते हैं कि उनके भाषण के किन हिस्सों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. A post shared by Mohd Jamal Ashraf (@jamalashraf23) अपने भाषण में उन्होंने जेल में बंद शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे पूर्व छात्रों के विधिक अधिकारों का मुद्दा उठाया और कहा कि बिना अदालती फैसले के किसी को 'आतंकवादी' करार नहीं दिया जा सकता. नोमान ने गाजा, फिलीस्तीन, सूडान और ईरान के नागरिकों के प्रति सहानुभूति जताई, जिसके बाद उनका भाषण सोशल मीडिया और राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया. A post shared by Mohd Jamal Ashraf (@jamalashraf23) नोमान अशरफ ने केवल जुबानी भाषण ही नहीं दिया, बल्कि 21 पन्नों का एक मैनिफेस्टो भी जारी किया. इसमें उन्होंने नॉन-नेट शोधार्थियों के स्टाइपेंड को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹15,000 करने, महिला सुरक्षा के लिए विमेंस सेल बनाने और एएमयू के ऑफ-कैंपस सेंटर्स (किशनगंज, मुर्शिदाबाद, मल्लापुरम) के छात्रों को प्रतिनिधित्व देने जैसे ठोस वादे किए हैं. 8 साल बाद हो रहे इस चुनाव में नोमान अशरफ का यह अंदाज कुछ छात्रों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है, तो वहीं विरोधी उम्मीदवार इसे 'राजनीतिक ध्रुवीकरण' की कोशिश बता रहे हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या नोमान अशरफ की यह 'प्रेसिडेंशियल स्पीच' और उनका 21 पन्नों का मैनिफेस्टो उन्हें एएमयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद की कुर्सी तक पहुंचा पाता है या नहीं.
ए. एम. यू. एस. यू. चुनावः मतदान से पहले नोमान अशरफ के भाषण ने छात्रों को प्रभावित किया
Aaj Tak•

Full News
Share:
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: Aaj Tak
Want to join the conversation?
Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.