ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों पर 'नरम हिंदुत्व' अपनाने का आरोप लगाया। साथ ही मुसलमानों से एक स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की अपील की। ओवैसी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष दल भाजपा के विस्तार को नहीं रोक पाएंगे और दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल चुनाव मतों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और 'मुसलमानों के उत्पीड़न' के कारण हार गई। ओवैसी का यह बयान ऐसे समय आया जब भाजपा ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीट जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया और इतिहास रच दिया। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हो गया। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP), महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) और तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) तथा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अतीत में 'नरम हिंदुत्व अपनाने' की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि 'मुसलमानों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने का प्रयास करना चाहिए।' एआईएमआईएम नेता ने दावा किया, 'अब समय आ गया है कि मुसलमान एकजुट हों और अपना खुद का राजनीतिक नेतृत्व बनाएं ताकि कम से कम उन्हें अपनी उपेक्षा को उजागर करने के लिए आवाज मिल सके' और ऐसे निर्वाचित प्रतिनिधि मिल सकें जो विकास के लिए काम कर सकें। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल की हार के कई कारण थे और एसआईआर उनमें से एक था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार भी था और उसके शासन के दौरान 'मुस्लिम समुदाय का उत्पीड़न हुआ।' तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर पार्टी ने मुसलमानों को 'वोट बैंक नहीं बल्कि नागरिक' माना होता तो पश्चिम बंगाल में विकास हुआ होता। उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में पश्चिम बंगाल के मतदाताओं के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए और तथाकथित 'धर्मनिरपेक्ष पार्टियां' भाजपा के विस्तार को रोक नहीं पाएंगी। उन्होंने कहा कि ऐसी पार्टियों को दिए गए वोट 'व्यर्थ' जा रहे हैं। ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में एआईएमआईएम को मत देने वाले मतदाताओं को धन्यवाद दिया, हालांकि पार्टी द्वारा चुनाव मैदान में उतारे गए सभी 11 उम्मीदवार हार गए। उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा को सत्ता सौंपी है। हमें उस फैसले का सम्मान करना होगा। यह जनता का फैसला है। तीसरी बात, मेरा मानना है और मैं लगातार यही कहता रहा हूं कि ये तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां भाजपा को रोक नहीं पाएंगी।' उन्होंने सवाल किया कि तृणमूल कांग्रेस और उसकी सरकार ने उन लोगों की मदद क्यों नहीं की जिनके नाम एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए? उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल ने एसआईआर के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया, लेकिन यह सिर्फ प्रतीकात्मक कदम था। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम हैदराबाद स्थित अपने मुख्यालय में एसआईआर के संबंध में लोगों की मदद कर रही थी। उन्होंने कहा, 'एसआईआर को नागरिकता से जोड़ना गलत है।' केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की 22 सीट पर जीत के लिए ओवैसी ने ईश्वर का आभार व्यक्त किया। आईयूएमएल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ का हिस्सा है, जिसने केरल विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार ने असम में लगभग 50,000 मुसलमानों को 'विस्थापित' कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एयूडीएफ) ने अधिक सीटें जीती होतीं, तो मुसलमानों को 'मजबूत आवाज' मिलती। सरमा पर एक साक्षात्कार में कथित तौर यह टिप्पणी करने के लिए कि लगभग 1,000 लोगों को रात के समय बांग्लादेश में धकेल दिया गया था, ओवैसी ने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने इसकी अनुमति दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा विदेश मंत्री की तरह व्यवहार कर रहे हैं और इससे बांग्लादेश-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचेगा। ओवैसी ने यह भी कहा कि उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को एक पत्र लिखा है और मौलाना तौसीफ रजा मजहरी की मौत की निष्पक्ष जांच और उनके परिवार को मुआवजे एवं एक सरकारी नौकरी दिये जाने की मांग की है। अधिकारियों ने गत शनिवार को बताया था उत्तर प्रदेश के बरेली में 35 वर्षीय मजहरी का शव रेल पटरी पर मिला था। मृतक के परिवार के एक सदस्य ने आरोप लगाया है कि उन्हें ट्रेन से फेंका गया था, हालांकि पुलिस ने इस दावे का खंडन किया है। ओवैसी ने कहा कि व्यक्ति की 'हत्या' घृणा अपराध है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवैसी ने राजनीतिक दलों पर'सॉफ्ट हिंदुत्व'अपनाने का आरोप लगाया
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