Science News in Hindi:समुद्र की सतह से लगभग 3 किमी नीचे ऑक्टोपस का एक विशाल झुंड मिला है. वैज्ञानिकों ने इस जगह को ऑक्टोपस गार्डन नाम दिया है. यह धरती पर ऑक्टोपस का अब तक का सबसे बड़ा समूह है. यहां हजारों की संख्या में पर्ल ऑक्टोपस एक साथ रह रहे हैं. आमौतर पर समुद्र की इतनी गहराई में पानी बर्फ जैसा ठंडा होता है लेकिन यहां पानी के अंदर एक ज्वालामुखी की वजह से चट्टानों की दरारों से गर्म पानी निकलता है. यह गर्म पानी इन ऑक्टोपस के लिए वरदान जैसा है. इसी गर्मी की वजह से हजारों ऑक्टोपस इस बंजर जगह पर रह रहे हैं. क्या होता है ऑक्टोपस गार्डन?गहरे समुद्र का पानी बहुत ठंडा होता है जिसकी वजह से ऑक्टोपस के अंडों को फूटने में कई साल लग जाते हैं. यहां ज्वालामुखी के पास का पानी लगभग 11 डिग्री सेल्सियस गर्म है जबकि बाकी समुद्र का पानी बर्फ जैसा ठंडा होता है. इस गर्मी की वजह से अंडे बहुत जल्दी फूट जाते हैं और जो काम सालों में होता था वह बहुत कम समय में हो जाता है. यह भी पढ़ें:चांद पर अब अमर होने का मौका...इस खास 'टाइम कैप्सूल' के जरिए भेजें अपना DNA और यादें क्यों खास है यह खोज?यह रिसर्च दिखाती है कि कैसे जमीन के अंदर से निकलने वाली थोड़ी सी गर्मी भी समुद्र की गहराई में जीवन का एक बड़ हब बना सकती है. पहले वैज्ञानिक सोचचे थे कि इतनी गहराई में जीवन बहुत मुश्किल है लेकिन अब पता चला है कि जीव अपनी जरूरत के हिसाब से गर्मी वाले ठिकाने खुद ढूंढ लेते हैं. गहरे समुद्र में अनोखा ठिकानासमुद्र के नीचे एक ऐसी ढलान वाली जगह है जहां चट्टानों की दरारों से गर्म पानी बाहर निकल रहा है. जहां पूरे समुद्र का पानी बर्फ जैसा ठंडा होता है वहां इन दरारों से निकलने वाली गर्मी ने एक कुदरती हीटर जैसा काम किया है. इस गर्मी की वजह से यहां हजारों की संख्या में मोती जैसे ऑक्टोपस (Pearl Octous) जमा हो गए हैं. यह भी पढ़ें:तहखाने की दीवार टूटी...और निकली 20,000 लोगों की सीक्रेट सिटी, जमीन से 85 मीटर नीचे दफन था इतिहास कितने ऑक्टोपस हो सकते हैं मौजूद?वैज्ञानिकों ने कैमरों की मदद से यहां 6,000 से ज्यादा ऑक्टोपस अपनी आंखों से देखे हैं लेकिन अंदाजा है कि यहां कुल 20,000 से ज्यादा ऑक्टोपस हो सकते हैं. समुद्र की इतनी गहराई में जहां भयानक दबाव और घना अंधेरा होता है वहां इतने सारे जीवों का एक साथ रहना किसी मौजिक से कम नहीं है.
ऑक्टोपस उद्यानः वैज्ञानिकों ने समुद्र की सतह से 3 किमी नीचे फलते-फूलते अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र का पता लगाया
Zee News Hindi•
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