देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। थरूर ने माना कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा छात्रों के हक में उठाए गए तमाम मुद्दे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' अभियान में पहले ही उठाए जा चुके थे। हालांकि, पार्टी को उस समय जनता से वैसा समर्थन और प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी, जैसा CJP के आंदोलन को मिला। थरूर ने कहा, 'यह बेहद दिलचस्प है कि CJP ने जिन मांगों को लेकर आंदोलन खड़ा किया, उन्हें मेरी पार्टी और राहुल गांधी ने अपने अभियान के जरिए कई महीने पहले ही उठाया था। लेकिन हमें इस बात पर गंभीरता से आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर कांग्रेस के प्रयासों को वैसी जन-प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली? हमें लोगों की नब्ज को और बेहतर तरीके से समझने की आवश्यकता है।' गौरतलब है कि CJP ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर 20 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर से अपना प्रदर्शन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल था। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने CJP के आंदोलन से पहले, 17 जून को राजस्थान के कोटा से 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की थी, जिसे बाद में देश के कई अन्य शहरों में ले जाया गया। राहुल का कहा क था कि देश का शिक्षा तंत्र एक शोषणकारी ढांचे में तब्दील हो चुका है, जो सरकारी शह पर पनप रहा है। तमाम समानताओं के बावजूद, कांग्रेस का यह अभियान वह व्यापक जन-समर्थन हासिल करने में नाकाम रहा, जो बाद में CJP के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन में देखने को मिला। थरूर के इस बयान ने पार्टी के भीतर जन-संपर्क की रणनीतियों पर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस सांसद ने भारत की युवा आबादी के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि दक्षिण एशिया की राजनीतिक पार्टियां अब यह नहीं मान सकतीं कि राजनीति के पुराने तरीके काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, '2029 में 'जेन जेड' (Gen Z) सबसे बड़ा वोटिंग ग्रुप होगा। भारत के ज्यादातर हिस्सों को जागना होगा और इस बात को समझना होगा कि युवा बदलाव चाहते हैं। अब सब कुछ पहले जैसा नहीं चल सकता है।' थरूर ने विपक्ष की राजनीति कैसे होनी चाहिए, इस पर अपनी पुरानी बात फिर से दोहराई। उन्होंने कहा, 'मैं अपनी पार्टी में यही बात कहता रहा हूं कि सड़क का काम सड़क पर और सदन का काम सदन में होना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'मैं अपनी पार्टी के प्रति बेवफा नहीं हूं, लेकिन मैं अपनी आजाद राय रखता हूं। कभी-कभी मेरे विरोधी मेरी राय का इस्तेमाल कर सकते हैं। कांग्रेस सबसे कम अलोकतांत्रिक पार्टी है। क्या आपने कभी सुना है कि बीजेपी में किसी ने असहमति जताई हो और पार्टी में बना रहा हो? मैं उस पार्टी में हूं जो मेरी सोच के सबसे करीब है।' उन्होंने उस आलोचना का भी जवाब दिया जो एक ऐसे मंच पर जाने के बाद हुई थी, जहां आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे। भागवत ने गुरुवार को मुंबई में 'इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' (IIMUN) की 15वीं सालगिरह के मौके पर लगभग 2,000 'जेन जेड' और 'जेन अल्फा' प्रतिभागियों को संबोधित किया था। उन्होंने कहा, 'जो लोग चाहते हैं कि मुझे पार्टी से निकाल दिया जाए क्योंकि मैं उस मंच पर गया था जहां मोहन भागवत भी मौजूद थे, वे यह नहीं समझते कि अलग सोच रखने वालों के साथ भी बातचीत की जा सकती है।'
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी के छात्र केंद्रित अभियान पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया की कमी पर सवाल उठाए
Dainik Jagran•
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