दूध लगभग हर घर की जरूरत है और इसका इस्तेमाल सुबह से लेकर रात तक अलग-अलग तरीके से किया जाता है. सुबह चाय बनाने से लेकर दही, पनीर और मिठाइयां बनाने में दूध का इस्तेमाल किया जाता है. कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए बच्चों को मील में दूध शामिल होता है. मगर क्या आप जानते हैं कि रोजाना इस्तेमाल किया जाने वाला यही दूध आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि आपके घर आने वाला दूध सिर्फ दूध नहीं है, बल्कि उसमें कई हानिकारक केमिकल्स मिले हुए हैं. हाल ही में महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने एक पॉडकास्ट में सिंथेटिक दूध को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने बताया कि कुछ लोग कम पैसे में नकली दूध तैयार कर उसे असली दूध में मिलाकर बेच रहे हैं. तुकाराम मुंढे ने बताया कि 25 मई को पदभार संभालने के बाद महाराष्ट्र FDA लगातार कार्रवाई कर रहा है. विभाग हर दिन 20 से ज्यादा जगहों पर जांच कर रहा है. अब तक 1,131 से अधिक निरीक्षण किए जा चुके हैं. इस दौरान करीब 49.57 करोड़ रुपये का खाद्य पदार्थ जब्त किया गया है. इसके अलावा लगभग 1.6 लाख लीटर संदिग्ध मिलावटी दूध भी पकड़ा गया है. पॉडकास्ट में तुकाराम मुंढे ने बताया कि जांच के दौरान अधिकारियों को असली दूध के अलावा, केमिकल और नकली सामान से सिंथेटिक दूध बनाने का एक पूरा समानांतर नेटवर्क चलता हुआ मिला. यह दिखाता है कि मिलावटी दूध किसी छोटी-मोटी गलती से नहीं, बल्कि बड़े पैमाने के अवैध धंधे की तरह तैयार किया जा रहा था. उनके मुताबिक, कुछ लोग स्किम्ड मिल्क पाउडर, केमिकल, इमल्सीफायर कॉस्टिक सोडा और यहां तक कि शैंपू जैसी चीजों का इस्तेमाल कर ऐसा मिक्सर तैयार करते हैं, जो देखने में बिल्कुल दूध जैसा लगता है. इस तरह का दूध असली दूध की तुलना में बहुत कम पैसे में तैयार हो जाता है. उनका कहना है कि, गाय के दूध जैसा दिखने वाला सिंथेटिक दूध लगभग 15 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध जैसा तैयार किया गया दूध करीब 30 रुपये प्रति लीटर में बन सकता है. जबकि मार्केट में गाय का दूध 40 से 50 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है. ऐसे में असली दूध में नकली दूध मिलाकर कुछ लोग ज्यादा पैसा कमाने की कोशिश करते हैं. यह पूरी तरह गैरकानूनी और बेहद शर्मनाक है. उन्होंने यह भी बताया कि यह मिलावट सिर्फ एक जगह पर नहीं हो रही है, बल्कि जांच में सामने आया है कि कुछ मामलों में किसान लेवल, दूध कलेक्शन सेंटर और चिलिंग सेंटर तक अलग-अलग लेवल में मिलावट की जा सकती है. इसके बाद ही यह नकली दूध डेयरियों तक जाता है और फिर इससे दूसरे डेयरी प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं. FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे का कहना है कि नकली दूध के धंधे को रोकने का सबसे असरदार तरीका ट्रेसेबिलिटी यानी हर बूंद दूध के सोर्स का रिकॉर्ड रखना है. जब तक यह पता नहीं होगा कि दूध किस किसान और किस पशु से आया है, तब तक मिलावट पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल रहेगा. उन्होंने बताया कि दूध कलेक्शन सेंटर के पास पहले से ही यह रिकॉर्ड मौजूद होता है कि किस किसान के पास कितनी गाय या भैंस हैं और कुल कितना दूध इकट्ठा हुआ. हालांकि अब महाराष्ट्र में इन रिकॉर्ड्स को और सख्ती से लागू किया जा रहा है. दूध में मिलावट रोकने में डिजिटल टेक्नोलॉजी काफी मददगार साबित हो सकती है, क्योंकि इसके जरिए गांवों में गाय-भैंस की संख्या कितनी है और उनके औसत दूध उत्पादन का रिकॉर्ड रखना आसान होगा. इससे यह रिकॉर्ड रखने में आसानी होगी कि एक दिन में कितना दूध इकट्ठा होता है और अगर रिकॉर्ड से ज्यादा दूध निकले तो तुरंत उसकी जांच की जा सकती है. इसके साथ ही उन्होंने उन्होंने नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन के तहत पशुओं की डिजिटल टैगिंग का भी जिक्र किया. जिससे काफी हद तक मिलावटी दूध को बाजार में आने से रोका जा सकता है.
कृत्रिम दूध घोटालाः नकली दूध को असली दूध के साथ मिलाया जा रहा हैः महाराष्ट्र एफ. डी. ए. आयुक्त
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