आमतौर पर सामान्य स्थिति में खिड़कियों से किसी तरह की तेज या लगातार आवाज नहीं आनी चाहिए. लेकिन अगर तेज हवा चलने पर खिड़की से सीटी जैसी आवाज सुनाई दे या मौसम बदलने के साथ शीशे या फ्रेम से चटकने और पॉपिंग जैसी आवाज आने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कई बार इसकी वजह बहुत छोटी होती है और घर पर कुछ आसान उपायों से समस्या कम हो सकती है. लेकिन कुछ मामलों में ऐसी आवाज खिड़की की सील, फ्रेम या पुरानी हो चुकी सामग्री में आई परेशानी का संकेत भी हो सकती है. खिड़की से आने वाली हर आवाज का कारण एक जैसा नहीं होता. इसलिए आवाज के प्रकार को समझना जरूरी है. सीटी की आवाज आमतौर पर फ्रेम, सैश या वेदरस्ट्रिपिंग के आसपास मौजूद छोटे गैप से हवा के अंदर आने की वजह से होती है. वहीं, चटकने या पॉपिंग की आवाज अक्सर तापमान बदलने पर खिड़की की अलग-अलग सामग्रियों के फैलने और सिकुड़ने से जुड़ी होती है. अगर हवा चलने पर खिड़की सीटी बजाने जैसी आवाज करती है, तो इसका मतलब हो सकता है कि बाहर की हवा कहीं से अंदर प्रवेश कर रही है. यह समस्या खासकर पुरानी खिड़कियों में ज्यादा देखने को मिल सकती है. समय के साथ वेदरस्ट्रिपिंग खराब हो सकती है, फ्रेम में हल्का बदलाव आ सकता है या लॉक खिड़की को फ्रेम से पूरी तरह कसकर बंद नहीं कर पाता. वेदरस्ट्रिपिंग के खराब होने पर उसमें दरारें पड़ सकती हैं, वह दब सकती है या अपनी जगह से ढीली हो सकती है. इससे खिड़की और फ्रेम के बीच छोटी सी जगह बन जाती है. तेज हवा के दौरान इसी जगह से हवा गुजरने पर सीटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है. कई बार खिड़की का फ्रेम थोड़ा खिसकने या उसके सही तरह से फिट न होने के कारण भी हवा अंदर आ सकती है. इसके अलावा, अगर खिड़की लगाते समय फ्रेम के आसपास सीलिंग ठीक तरीके से नहीं हुई है, तो वहां से भी हवा का रिसाव हो सकता है. सबसे पहले खिड़की की वेदरस्ट्रिपिंग को ध्यान से देखें. अगर उसमें दरार, गैप, ढीलापन या दबने के निशान दिखाई दे रहे हैं, तो उसे बदलने की जरूरत हो सकती है. खराब वेदरस्ट्रिपिंग को बदलने से हवा का रिसाव और उससे होने वाली आवाज दोनों कम हो सकती हैं. इसके बाद खिड़की के लॉक और उसकी फिटिंग को देखें. अगर खिड़की बंद करने के बाद भी वह फ्रेम से पूरी तरह चिपकी हुई महसूस नहीं होती, तो हार्डवेयर या लॉकिंग सिस्टम में एडजस्टमेंट की जरूरत हो सकती है. सही फिटिंग खिड़की की सील को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है. अगर खिड़की और दीवार के बीच कहीं छोटा गैप दिखाई देता है, तो समस्या सिर्फ खिड़की की नहीं हो सकती. ऐसे मामलों में फ्रेम के आसपास की सीलिंग की जांच कराना जरूरी है. छोटे गैप को दोबारा सील करने या री-कॉल्किंग से एयर लीकेज कम किया जा सकता है. हर आवाज हवा के रिसाव की वजह से नहीं होती. अगर खिड़की से पॉपिंग या क्रैकिंग जैसी आवाज आती है, तो इसका कारण तापमान में बदलाव भी हो सकता है. गर्मी और ठंड के साथ खिड़की की कुछ सामग्रियां फैलती और सिकुड़ती हैं. इसी दौरान उनके बीच होने वाली हलचल से आवाज पैदा हो सकती है. यह समस्या खासकर तब ज्यादा महसूस हो सकती है जब बाहर के तापमान में तेजी से बदलाव हो, खिड़की सीधे धूप में हो या मौसम बदल रहा हो. पुरानी या कम गुणवत्ता वाली सामग्री में समय के साथ यह समस्या ज्यादा स्पष्ट हो सकती है. अगर आवाज कभी-कभार आती है और इसके साथ कोई दूसरी परेशानी नहीं है, तो जरूरी नहीं कि यह किसी बड़ी खराबी का संकेत हो. लेकिन अगर आवाज लगातार आती है, तो खिड़की की जांच करना बेहतर है. सबसे पहले ढीले हार्डवेयर को देखें. किसी हिस्से के ढीले होने पर खिड़की के हिलने से आवाज पैदा हो सकती है. इसके अलावा फ्रेम के टेढ़े या मुड़े होने की भी जांच करनी चाहिए. अगर फ्रेम का आकार बदल गया है, तो खिड़की पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. खिड़की के आसपास की इंसुलेशन और सीलिंग भी महत्वपूर्ण है. अगर इंसुलेशन कमजोर है, तो बाहर के तापमान में बदलाव का असर खिड़की की सामग्री पर ज्यादा पड़ सकता है. सिर्फ आवाज आने से हमेशा खिड़की बदलने की जरूरत नहीं होती. लेकिन अगर आवाज के साथ ठंडी या गर्म हवा अंदर आने लगे, शीशों के बीच धुंध या कंडेनसेशन दिखाई दे, खिड़की खोलने-बंद करने में परेशानी हो, फ्रेम टेढ़ा नजर आए या घर के अंदर तापमान असमान रहने लगे, तो समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए. अगर घर की कई खिड़कियों से तेज हवा में सीटी की आवाज आती है, तो यह केवल एक छोटी सीलिंग समस्या नहीं बल्कि पुरानी खिड़कियों की एयरटाइटनेस और इंसुलेशन से जुड़ी परेशानी हो सकती है. ऐसे में बार-बार छोटी मरम्मत कराने के बजाय खिड़कियों की पूरी स्थिति की जांच कराना ज्यादा उपयोगी हो सकता है. जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और 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खिड़की की आवाज़ों को समझनाः कारण और परिणाम
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