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गुजरात का अंबाजी क्षेत्र संभावित बड़े खनन केंद्र के रूप में सामने आया

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गुजरात का अंबाजी क्षेत्र संभावित बड़े खनन केंद्र के रूप में सामने आया
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उदयपुर:अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में छिपे दुर्लभ खनिज भंडार अब देश के सामने आने वाले हैं। उदयपुर, सिरोही और आबूरोड से जुड़े गुजरात के अंबाजी क्षेत्र में 100 मिलियन टन से अधिक खनिज भंडार होने का अनुमान लगाया गया है। प्रारंभिक आकलन में यहां कॉपर, गोल्ड, लेड, जिंक और सिल्वर जैसे बहुमूल्य खनिजों की मौजूदगी सामने आई है, जिससे यह इलाका देश के संभावित बड़े माइनिंग क्षेत्रों में शामिल हो गया है।जीएमडीसी और एमएलएसयू के बीच हुआ एमओयूखनिज संभावनाओं के वैज्ञानिक मूल्यांकन और खोज को आगे बढ़ाने के लिए गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जीएमडीसी) ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर केभू-विज्ञान विभाग के साथ रिसर्चऔर कंसलटेंसी को लेकर समझौता किया है। दो वर्षों की अवधि वाले इस एमओयू के तहत अंबाजी पर्वत क्षेत्र में खनिज खोज और माइनिंग से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।1840 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी चरणबद्ध पड़तालखनिजों की खोज शुरू। सांकेतिक तस्वीर।परियोजना के अंतर्गत कुल 1840 हेक्टेयर क्षेत्र मेंखनिजों की खोजऔर उनके फैलाव का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 140 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है। जीएमडीसी द्वारा गठित विशेष सोसायटी के माध्यम से इस काम की जिम्मेदारी उदयपुर विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग को सौंपी गई है, जहां विशेषज्ञ टीम विस्तृत सर्वे और विश्लेषण करेगी।विशेषज्ञों की टीम कर रही नेतृत्वइस शोध परियोजना का नेतृत्व भू-विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हर्ष भू और प्रोफेसर रितेश पुरोहित कर रहे हैं। इनके साथ डॉ. हरीश कपासिया, डॉ. निरंजन मोहंती, डॉ. टी.के. बिनवाल और प्रो. के.के. शर्मा की टीम जुड़ी हुई है। शोध कार्य के लिए विभाग की आधुनिक प्रयोगशालाओं का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही सात विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देकर उन्हें सीधे इस परियोजना से जोड़ा गया है, जिससे अकादमिक अध्ययन के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।पर्यावरण और आस्था की सुरक्षा पर जोरखनन गतिविधियों को लेकर पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रो. रितेश पुरोहित ने बताया कि अंबाजी क्षेत्र पहाड़ों, वन क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों से घिरा हुआ है। इसे ध्यान में रखते हुए अधिकांश खनन कार्य अंडरग्राउंड पद्धति से किए जाएंगे, ताकि पहाड़, जंगल और आस्था से जुड़े स्थल सुरक्षित रहें। यह परियोजना न केवल खनिज संसाधनों की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास, रोजगार और शोध के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद है।

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