आपने दोपहर के खाने में दो रोटी खाई थी। शाम होने को आई, लेकिन अभी तक पेट भरा हुआ है। भूख लगने का नाम ही नहीं ले रही। पेट भी फूला-फूला लग रहा है। कई बार खाने के कुछ घंटे बाद भी ऐसा लगता है, जैसे पेट ने खाना पचाने का प्रोसेस शुरू ही नहीं किया। आपको लग सकता है कि शायद ये गैस या अपच की समस्या है। लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार हो, भूख कम लगे, खाने का मन कम हो और वजन भी घटने लगे, तो सवाल उठता है कि आखिर पेट के भीतर चल क्या रहा है? यह स्थिति ‘गैस्ट्रोपेरेसिस’ हो सकती है। इसलिए आज में गैस्ट्रोपेरेसिस के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. दत्तात्रेय सोलंके, कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई गैस्ट्रोपेरेसिस में पेट खाना पचाने के लिए उसे आगे छोटी आंत तक भेजने में सामान्य से ज्यादा समय लगाता है। इसे एक आसान उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। मान लीजिए- आसान शब्दों में इसे ‘पेट के धीरे खाली होने की समस्या’ कह सकते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं- पेन किलर और कुछ दूसरी दवाएं पेट के खाली होने की गति धीमी कर सकती हैं। गैस्ट्रोपेरेसिस के सभी कारण ग्राफिक में देखिए- गैस्ट्रोपेरेसिस होने पर पेट से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं। इसके सभी प्रमुख लक्षण ग्राफिक में देखिए- इन लक्षणों की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। गैस्ट्रोपेरेसिस का पता लगाने के लिए डॉक्टर पहले मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि खाना खाने के बाद पेट कितनी देर तक भरा रहता है, उल्टी होती है या नहीं और वजन तो नहीं घट रहा। इसके बाद जरूरत के अनुसार कुछ टेस्ट कराए जाते हैं। इसका इलाज इसके कारण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। इलाज का मुख्य उद्देश्य पेट से खाना आगे बढ़ने में मदद करना, लक्षणों को कम करना और शरीर में पोषण की कमी नहीं होने देना है। एक बार में ज्यादा खाने की बजाय दिन में 5–6 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाना खाएं। भोजन अच्छी तरह चबाएं। डॉक्टर की सलाह से नरम, अच्छी तरह पका हुआ और कम फैट वाला भोजन लें। कुछ लोगों को कम फाइबर वाला भोजन भी लेने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर पेट से खाना आगे बढ़ाने में मदद करने वाली या मतली और उल्टी कम करने वाली दवाएं दे सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा शुगर पेट की गति को धीमा कर सकती है। अगर मरीज पर्याप्त खाना नहीं खा पा रहा है या वजन घट रहा है, तो डॉक्टर डाइट में बदलाव और पोषण संबंधी मदद की सलाह दे सकते हैं। अगर दवाओं और खानपान में बदलाव से फायदा न हो, तो डॉक्टर एंडोस्कोपी या सर्जरी से जुड़ी प्रक्रियाओं पर विचार कर सकते हैं। गैस्ट्रोपेरेसिस का कोई एक इलाज सभी मरीजों के लिए सही नहीं होता। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं शुरू या बंद न करें। इससे पाचन और शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिलने में परेशानी हो सकती है। इसके सभी संभावित कॉम्प्लिकेशंस पॉइंटर्स से समझिए- खाना कम खा पाने या पोषक तत्वों का पर्याप्त सेवन न होने से शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है। बार-बार उल्टी होने से शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। पर्याप्त भोजन न मिल पाने से वजन घट सकता है और शरीर में कमजोरी आ सकती है। डायबिटीज के मरीजों में खाना देर से पचने के कारण ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। पेट में बिना पचा खाना जमा होकर ठोस गांठ बना सकता है। इससे पेट से खाना आगे जाने में रुकावट हो सकती है। संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने से पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। इसे ग्राफिक में देखिए- कुल मिलाकर गैस्ट्रोपेरेसिस के लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लें। सही खानपान, ब्लड शुगर पर नियंत्रण और उचित इलाज से इसे मैनेज किया जा सकता है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि बार-बार पानी पीने के बावजूद मुंह सूखा रहता है? खाना निगलने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है या रात में मुंह सूखने से नींद खुल जाती है? अगर हां, तो इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। यह जेरोस्टोमिया यानी ड्राई माउथ का संकेत हो सकता है।
गैस्ट्रोपेरिसिस को समझना-कारण और परिणाम
Dainik Bhaskar•

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