विस्तारAdd as a preferredsource on googleChaitra Navratri 1st Day:आज, 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है। धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्रि माता भगवती की आराधना, संकल्प, साधना और सिद्धि का दिव्य समय है। यह तन-मन को निरोग रखने का सुअवसर भी है। देवी भागवत के अनुसार देवी ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में सृष्टि का सृजन, पालन और संहार करती हैं। भगवान महादेव के कहने पर रक्तबीज, शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ आदि दानवों का संहार करने के लिए माँ पार्वती ने असंख्य रूप धारण किए, किंतु देवी के प्रमुख नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन देवी मां के विशिष्ट रूप को समर्पित होता है और हर स्वरूप की उपासना करने से अलग-अलग प्रकार के मनोरथ पूर्ण होते हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानी चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-आराधना होती है। आइए जानते हैं संपूर्ण पूजन विधि और महत्व।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रथम दिन का आरंभ और शैलपुत्री पूजननवरात्रि पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के पहले स्वरूप ‘शैलपुत्री’ का पूजन किया जाता है। चैत्र नवरात्रि 19 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो रहे हैं और इसी दिन से साधना का शुभारंभ होता है। यह दिन साधक के लिए आस्था और संकल्प का प्रतीक होता है, जहां से पूरे नौ दिनों की आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है।विज्ञापनविज्ञापनशैलपुत्री का स्वरूप और आध्यात्मिक महत्वपर्वतराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। वृषभ पर विराजमान इस माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित हैं। नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इनका पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और यहीं से योग साधना का आरंभ होता है, जो साधक के जीवन में स्थिरता और संतुलन स्थापित करता है।Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में रखने जा रहे हैं पूरे नौ दिन के व्रत ? जानें इससे जुड़े जरूरी नियमशैलपुत्री की पूजा विधिप्रथम नवरात्रि के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।इसके बाद विधिपूर्वक कलश स्थापना करें। माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें।इसके पश्चात रोली, अक्षत, पुष्प और विशेष रूप से सुगंधित फूल अर्पित करें।माता को सफेद वस्त्र, घी का दीपक और नैवेद्य के रूप में शुद्ध घी या उससे बने प्रसाद का भोग लगाना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जप करें और श्रद्धा भाव से आरती करें।अंत में अपनी मनोकामना के साथ देवी का ध्यान करें।Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में मां की स्थापना करते समय न करें ये गलती, जानें इससे जुड़े नियमपूजा का फल और कृपा का प्रभावमाँ शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं, जो सहज भाव से पूजन करने पर शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। इनकी कृपा से जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया उनका पूजन साधक के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है।Chaitra Navratri 2026: माता रानी को खुश करने के लिए करें ये उपाय, प्रसन्न होंगी देवी और बरसेगी कृपाआत्मबल और मानसिक स्थिरता का आधारयदि मन विचलित रहता हो या आत्मबल में कमी महसूस होती हो, तो शैलपुत्री की आराधना विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। उनकी उपासना से व्यक्ति के भीतर साहस, धैर्य और आत्मविश्वास का विकास होता है। यह साधना जीवन के आरंभिक आधार को मजबूत करती है और व्यक्ति को आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।विज्ञापनविज्ञापनसबसे विश्वसनीयहिंदी न्यूज़वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ेंआस्था समाचारसे जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसेपॉज़िटिव लाइफ़फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभीधर्मऔरत्योहारआदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करेंअमर उजाला हिंदी न्यूज़ APPअपने मोबाइल पर।
चैत्र नवरात्रिः भक्ति और आध्यात्मिक विकास का नौ दिवसीय उत्सव
Amar Ujala•

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