जापान को अब चीन की मेहरबानी की जरूरत नहीं रह गई है क्योंकि उसने रेयर अर्थ मेटल्स का खुद का खान खोज निकाला है. जापान ने एक महीने पहले अपना एक रिसर्च जहाज समंदर में उतारा था जिसने 6 किलो मीटर की गहराई में गहरे समुद्र के अंदर रेयर अर्थ मेटल्स की खोज की थी. अब जापान की सरकार ने सोमवार, 2 फरवरी को उसे समुद्र की इस गहराई पर जो गाद (सेडिमेंट) मिले हैं, उसमें रेयर अर्थ मेटल्स पाए गए हैं. जापान के लिए यह खुशखबरी उस समय आई है जब चीन से उसके रिश्तें बहुत खराब चल रहे हैं. जापान का कहना है कि यह मिशन समुद्र के अंदर इतनी गहराई में रेयर अर्थ मेटल्स निकालने वाला दुनिया का पहला ऐसा प्रयास था.काम की बात: पहले तो आपको आसान भाषा में बताते हैं कि आखिर रेयर अर्थ मेटल्स होते क्या हैं. रेयर अर्थ मेटल्स धरती के अंदर पाए जाने वाले 17 दुर्लभ धातु हैं. आज के टेक्नोलॉजी के जमाने में रेयर अर्थ मेटल्स ऐसा फैक्टर है जिससे कंट्रोल अपने हाथ में बनाया रखा जा सकता है. दरअसल हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ी बनाने से लेकर एयरोस्पेस बनाने तक, सेमीकंडक्टर बनाने से और उपभोक्ता वस्तुओं बनाने तक, हर जगह रेयर अर्थ के कंपोनेंट अहम हैं. अभी चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है. दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का 60-70 प्रतिशत हिस्सा चीन का है.जापान की तो बल्ले-बल्ले हो गई12 जनवरी को जापान के इसवैज्ञानिक ड्रिलिंग जहाजकी ऐतिहासिक यात्रा शुरू हुई जिसका नाम चिक्यू है. शिज़ुओका के शिमिज़ु बंदरगाह से यह जहाज प्रशांत क्षेत्र के सुदूर द्वीप मिनामी तोरीशिमा के लिए रवाना हुआ. पहले से ही माना जा रहा था कि इस द्वीप के आसपास के पानी में मूल्यवान खनिजों का एक समृद्ध भंडार है. और यह साबित भी हो गया है. जापान ने यहां समंदर के अंदर रेयर अर्थ मेटल्स खोज लिए हैं.न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार जापान के सरकारी प्रवक्ता केई सातो ने इसे जापान की आर्थिक सुरक्षा और व्यापक समुद्री विकास दोनों के संदर्भ में एक बड़ी उपलब्धि" बताया है. उन्होंने कहा कि जो सैंपल मिल हैं, उनका पहले विश्लेषण किया जाएगा. यह जाना जाएगा कि यहां के सैंपल में रेयर अर्थ के कितने मेटल्स मौजूद हैं.द इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के रिसर्च फेलो ताकाहिरो कामिसुना ने एएफपी को बताया, "अगर जापान लगातार मिनामी तोरीशिमा के आसपास से रेयर अर्थ मेटल्स को सफलतापूर्वक निकाल सकता है, तो यह प्रमुख उद्योगों के लिए घरेलू सप्लाई चेन को सुरक्षित करेगा. इसी तरह, यह ताकाची सरकार के लिए चीन पर निर्भरता को काफी कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति होगी."चीन और जापान में तल्खी चरम परचीन दुनिया में रेयर अर्थ कासबसे बड़ा सप्लायर देशहै और वो इस बात की अहमियत जानता है. लेकिन अभी जापान को चीन के साथ बढ़ते राजनीतिक, व्यापार और सुरक्षा तनाव का सामना करना पड़ रहा है. जापान की प्रधान मंत्री साने ताकाची ने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अगर ताइवान के खिलाफ चीन कोई कार्रवाई करता है तो जापानी हस्तक्षेप कर सकता है. ताइवान एक स्व-शासित लोकतांत्रिक द्वीप है और उसपर चीन अपना दावा करता है. जापान के बयान के बाद से चीन और उनके बीच तनाव चरम पर है. दोनों देश एक-दूसरे के प्रति बढ़ती शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों और बयानबाजी में लगे हुए हैं. इस महीने की शुरुआत में, चीन ने जापान को रेयर अर्थ मेटल्स से संबंधित उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध कड़े कर दिए.यह भी पढ़ें: तकनीक से ताकत तक रेयर अर्थ मिनरल्स की लड़ाई, चीन के आगे भारत कहां खड़ा है? पढ़ें 360 डिग्री विश्लेषण
जापान ने सोने पर हमला कियाः अपने ही पिछवाड़े में दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की खोज
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