जब हमारे शरीर के अंगों में वॉटर रिटेंशन होता है तो हमारे शरीर के कुछ हिस्सों जैसे हाथ, पैर, चेहरे और पेट की मांसपेशियों में सूजन हो जाती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा कहती हैं कि जब हमारा शरीर मिनिरल्स के लेवल को बैलेंस नहीं कर पाता है तो इसकी वजह से शरीर के टिशूज़ में पानी जमा होने लगता है और शरीर के अंग फूलने लगते हैं। ये स्थिति आपके पैरों, एड़ियों और टखनों में भी भयंकर दर्द का कारण बन सकती है। वॉटर रिटेंशन का मतलब है शरीर के अंदरूनी हिस्सों में तरल पदार्थ का जमा होना। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के ऊतकों यानि टिशूज में जरूरत से ज़्यादा पानी जमा हो जाता है। इससे शरीर के कुछ खास हिस्सों, जैसे पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन आ जाती है। यह समस्या महिलाओं में ज्यादा आम है, खासकर हार्मोनल बदलावों के कारण जैसे कि पीरियड्स से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा अधिक होता है। इसके अलावा, ज़्यादा नमक खाना, कम पानी पीना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और दिल, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियां भी इस समस्या का कारण बन सकती हैं। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की समस्या या दिल की बीमारी जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इससे बचने के लिए नमक का सेवन कम करें, खूब पानी पिएं, रोज़ाना हल्की-फुल्की कसरत करें और लंबे समय तक एक ही जगह पर एक ही स्थिति में बैठने से बचें। अगर सूजन बनी रहती है, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। स्वस्थ दिनचर्या और खान-पान अपनाकर शरीर में पानी जमा होने की समस्या से बचा जा सकता है। डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा विशेषज्ञ) ने सुझाव देते हुए इसके लिए कुछ घरेलू उपाय बताए हैं जिन्हें आप अपना सकते हैं। सोडियम का सेवन कम करें और जंक फूड या डिब्बाबंद चीज़ों से बचें। केले, एवोकाडो, हरी सब्ज़ियां, दही और नट्स जैसी चीज़ें खाएं, जो शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखने से टॉक्सिन्स और अतिरिक्त नमक पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं। नियमित व्यायाम और टहलने से ब्लड सर्कुलेशन और लिम्फैटिक सिस्टम का काम बेहतर होता है, जिससे सूजन कम होती है। कुलथी का पानी पीना और पार्सले का सेवन करना नैचुरल डाइयूरेटिक का काम करते हैं। ठंडे पानी से नहाना और हल्के हाथों से मालिश करने से भी सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है और सूजन कम हो सकती है। अगर सूजन कम है तो ठंडी सिंकाई करें, कोल्ड थेरेपी का मुख्य मकसद सूजन और तेज़ दर्द को कम करना है। इसके विपरीत, हीट थेरेपी रक्त संचार को बढ़ाती है, जिससे ताज़ा सूजन वाली जगह पर सूजन और बढ़ सकती है और दर्द भी तेज़ हो सकता है। सूजन है तो घबराएं नहीं, आयुर्वेद के अनुसार बताये गए उपचार अपनाएं। गर्दन पर परफ्यूम लगाना बंद कर दें, हो सकता है कैंसर का खतरा, कैम्ब्रिज के Cancer शोधकर्ता ने बताया Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
जल धारण को समझनाः कारण, लक्षण और परिणाम
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