मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति विद्यार्थियों की मातृभाषा का सम्मान करे और उनके ज्ञान, कौशल व अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत बनाए। शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना भी है।विज्ञापनमुख्यमंत्री ने एक व्यावहारिक और दूरदर्शी शिक्षा नीति बनाने पर जोर दिया। इसमें विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों, कौशल विकास और डिजिटल दक्षता का ध्यान रखा जाए। उन्होंने बताया कि झारखंड में भाषाई विविधता बहुत व्यापक है। बच्चे घर में मातृभाषा और स्थानीय भाषाएं बोलते हैं। विद्यालयों में शिक्षण हिंदी या अंग्रेजी माध्यम से होता है। इस अंतर से प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की समझ प्रभावित नहीं होनी चाहिए। झारखंड की भाषाई विविधता राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान है। इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर नई पद्धतियां विकसित की जाएं। इससे विद्यार्थी अपनी भाषा में सहजता से सीख सकें।विज्ञापनमुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया। शिक्षा के साथ रुचि, प्रतिभा और व्यावहारिक कौशल भी विकसित हों। उन्होंने कौशल आधारित शिक्षा में हॉकी को शामिल करने पर विचार करने को कहा। झारखंड के बच्चे हॉकी के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं संचालित करने पर भी जोर दिया। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले इसकी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इससे विद्यार्थी भाषाई रूप से दक्ष और आत्मविश्वासी बनेंगे।मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से भी दक्ष बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। शिक्षा नीति ऐसी हो जिससे उन्हें भविष्य में कोई परेशानी न हो। कक्षाओं में शिक्षण और प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि नीति संवर्धनात्मक बहुभाषिकता के सिद्धांत पर आधारित हो। इसमें पहली भाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा जोड़ी जाए। मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को परस्पर सहयोगी भाषा समूह के रूप में देखा जाए।अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 में भाषा शिक्षा नीति निर्माण समिति का गठन हुआ था। समिति ने झारखंड और अन्य राज्यों की शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन कर प्रारूप तैयार किया है। इस नीति में तीन प्रमुख शैक्षणिक चरण शामिल हैं। इनमें पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा 2 तक, कक्षा 3 से कक्षा 5 तक और कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के चरण हैं। इन चरणों में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को स्कूली शिक्षा में समाहित करने पर ध्यान दिया गया है। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, टीआरआई के निदेशक आलोक शिकारी कच्छप और जैक के सचिव एस.डी. तिग्गा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
झारखंड के मुख्यमंत्री ने व्यावहारिक कौशल और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए दूरदर्शी शिक्षा नीति का आह्वान किया
Amar Ujala•

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