रांचीःपश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पहली बार सरकार बनने जा रही है। इसके साथ ही पूर्वी भारत में सिर्फ झारखंड ही एक राज्य होगा, जहां भाजपा की सरकार नहीं होगी। इन राज्यों में कांग्रेस का लगभग पूरी तरह से सफाया हो गया है। ऐसे में कांग्रेस पर सत्ता में वापसी का दबाव बढ़ गया है। जबकि भाजपा के खिलाफ लड़कर सत्ता को बरकरार रखना सीएम हेमंत सोरेन के लिए बड़ी चुनौती होगी।पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम पर दिखेगा सीधा असरझारखंड के पड़ोसी राज्य बिहार, छत्तीसबढ़ और ओडिशा के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गई है। कल तक पूर्वी भारत में झारखंड के साथ पश्चिम बंगाल में भाजपा और एनडीए की सरकार नहीं थी, लेकिन अबपश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह से बदलगई है। आने वाले समय में झारखंड पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।पश्चिम बंगाल और असम चुनाव को लेकर कांग्रेस-जेएमएम में दूरियां दिखींदेश की इन नई राजनीतिक परिस्थितियों मेंहेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बढ़ गया है। हेमंत सोरेन की हाल के महीनों में दिल्ली यात्राओं, गठबंधन की अंदरूनी अटकलों और केंद्र से फंड रिलीज में देरी की शिकायतों ने सुगबुगाहट तेज कर दी है। हालांकि कांग्रेस ने बार-बार कहा है कि इंडिया गठबंधन 'रॉक-सॉलिड' है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं जारी हैं। कांग्रेस और झामुमो के बीच पश्चिम बंगाल और असम चुनाव को लेकर दूरियां भी दिखीं। दोनों राज्यों में कांग्रेस और जेएमएम के नेता एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आए।असम में जेएमएम के कारण कांग्रेस को 12 सीटों पर सीधा नुकसानअसम विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने गठबंधन के प्रस्ताव को ठुकरा कर अकेले 16 सीटों पर चुनाव लड़कर कांग्रेस को सीधा नुकसान पहुंचाने का काम किया। वोट बंटवारे के बीजेपी उम्मीदको कम से कम 12 सीटों पर सीथा नुकसान उठाना पड़ा। यदि इन सीटों पर जेएमएम उम्मीदवार खड़ा नहीं होते तो भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था।पश्चिम बंगाल में जेएमएम ने कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी का दिया साथअसम की तरह ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की जगह ममता बनर्जी का साथ देने का काम किया। पश्चिम बंगाल में जेएमएम ने उम्मीदवार उतारने की जगह न सिर्फ ममता बनर्जी की पार्टी को टीएमसी को समर्थन दिया, बल्कि टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में कई चुनावी सभाएं भी की।राज्यसभा चुनाव को लेकर भी जेएमएम-कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेजझारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावतय है। इसे लेकर भी जेएमएम और कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। जेएमएम नेताओं की ओर से दोनों सीटों पर जीत का दावा किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस की ओर से भी एक सीट पर हक जताया जा रहा है।भाषा और कानून व्यवस्था को लेकर भी सवालकांग्रेस नेताओं की ओर से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा की लिस्ट में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल करने का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस के दो मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह की ओर से कैबिनेट की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया। इसके अलावा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद समेत अन्य नेताओं की ओर से कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं।इन राजनीतिक परिस्थितियों में भी झारखंड में भी भाजपा की ओर हेमंत सोरेन सरकार को चारों ओर से घेरने की राजनीति शुरू की गई है। भाजपा की ओर से झारखंड में इंडिया गठबंधन सरकार की 'राजनीतिक घेराबंदी' शुरू होने की चर्चा के बीच झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य झारखंड की तुलना कीवी फल से कते हैं। वे कहते हैं कि जब शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है तो कीवी सबसे ज्यादा असरदार होता है। कीवी का रंग बाहर से भूरा होता है और अंदर से हल्का हरा होता है। यही हरा रंग प्लेटलेट्स बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों से घिरे होने के बावजूद झामुमो कीवी फल की तरह विपक्ष का प्लेटलेट्स को बढ़ाने का काम करेगा।
झारखंड में पहली बार सत्ता गंवाने जा रही है भाजपा
Navbharat Times•
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