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टॉयलेट बाउल के दागः सिर्फ गंदगी ही नहीं, बल्कि कठोर पानी से मिलने वाले खनिज भी

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टॉयलेट बाउल के दागः सिर्फ गंदगी ही नहीं, बल्कि कठोर पानी से मिलने वाले खनिज भी
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घर की सफाई में टॉयलेट की सफाई सबसे जरूरी कामों में से एक है. कई लोग टॉयलेट को नियमित रूप से साफ करते हैं और ब्रश से अच्छी तरह रगड़ते भी हैं, लेकिन इसके बावजूद टॉयलेट बाउल पर पीले निशान या पीली रिंग दिखाई देती रहती है. कई बार बार-बार रगड़ने के बाद भी ये निशान पूरी तरह साफ नहीं होते. ऐसे में सिर्फ गंदगी को इसकी वजह मानना सही नहीं है. टॉयलेट पर बनने वाले पीले निशानों के पीछे पानी में मौजूद मिनरल्स भी जिम्मेदार हो सकते हैं. टॉयलेट बाउल में आमतौर पर मिनरल्स, जंग, कॉपर और फफूंद के कारण अलग-अलग रंग के दाग बन सकते हैं. दाग का रंग देखकर काफी हद तक अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके पीछे वजह क्या है. इसलिए किसी भी दाग को हटाने से पहले उसकी वजह समझना जरूरी है. अगर टॉयलेट बाउल पर सफेद, पीले या भूरे रंग की रिंग दिखाई दे रही है तो इसकी एक बड़ी वजह हार्ड वॉटर हो सकता है. हार्ड वॉटर में कैल्शियम, मैग्नीशियम और लाइमस्केल जैसे मिनरल्स अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं. पानी लगातार टॉयलेट बाउल के संपर्क में रहता है. समय के साथ ये मिनरल्स सतह पर जमा होने लगते हैं और पीले या भूरे निशान का रूप ले सकते हैं. यही वजह है कि कई बार टॉयलेट ब्रश से अच्छी तरह रगड़ने के बाद भी पीले निशान नहीं जाते. लंबे समय तक जमा रहने पर मिनरल्स की परत और सख्त हो सकती है. ऐसे में केवल सामान्य सफाई से इसे हटाना मुश्किल हो जाता है. How To Prevent Lizards: क्या दीवार पर छिपकली देखकर लगता है डर? किचन और कमरों से भगाने का 1 पक्का इलाज टॉयलेट में हर दाग हार्ड वॉटर की वजह से नहीं बनता. अगर बाउल पर गहरे नारंगी या लाल रंग के निशान दिखाई दे रहे हैं तो इसकी वजह जंग हो सकती है. पुराने या खराब होते पाइप से पानी में जंग मिल सकती है, जो धीरे-धीरे टॉयलेट की सफेद सतह पर निशान छोड़ देती है. वहीं, नीले या हरे रंग के दाग पानी में कॉपर की अधिक मात्रा या कॉपर पाइप में हो रहे क्षरण के कारण दिखाई दे सकते हैं. अगर टॉयलेट में काले या हरे छोटे-छोटे धब्बे दिखाई दे रहे हैं और साथ में सीलन जैसी गंध भी आ रही है तो इसकी वजह फफूंद हो सकती है. बाथरूम में ज्यादा नमी और नियमित सफाई न होने पर ऐसी समस्या बढ़ सकती है. अगर टॉयलेट में पीले निशान अभी बनने शुरू हुए हैं तो उन्हें साफ करने के लिए बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी हल्की खुरदरी बनावट सतह पर जमा गंदगी और मिनरल्स की शुरुआती परत को हटाने में मदद कर सकती है. साथ ही यह बदबू कम करने में भी उपयोगी हो सकता है. इसके लिए टॉयलेट बाउल में लगभग एक कप बेकिंग सोडा डालें. इसके बाद करीब डेढ़ कप सफेद सिरका डाल सकते हैं. दोनों के मिलने पर झाग बनने लगेगा. इसे कुछ देर तक रहने दें. हल्के निशान होने पर कुछ समय बाद टॉयलेट को फ्लश किया जा सकता है. अगर निशान पुराने हैं तो मिश्रण को ज्यादा देर तक छोड़ने के बाद ब्रश से साफ किया जा सकता है. कई महीनों से जमा पीले या भूरे निशानों को हटाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. लंबे समय तक जमा रहने के कारण मिनरल्स की मोटी परत बन जाती है. ऐसी स्थिति में सफाई से पहले टॉयलेट बाउल में मौजूद पानी कम करने से क्लीनिंग प्रोडक्ट सीधे दाग के संपर्क में आ सकता है. इसके बाद टॉयलेट के लिए बने क्लीनर का इस्तेमाल उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है. क्लीनर को कुछ समय तक दाग पर रहने देने के बाद टॉयलेट ब्रश से रगड़ें. बहुत ज्यादा जिद्दी मिनरल जमा होने पर पोर्सिलेन के लिए सुरक्षित प्यूमिक स्टोन का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इसे पहले पानी से अच्छी तरह गीला करना जरूरी है और बहुत हल्के हाथ से इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि टॉयलेट की सतह को नुकसान न पहुंचे. दो अलग-अलग क्लीनिंग केमिकल्स को आपस में मिलाने से बचें. खासकर ब्लीच और एसिड वाले टॉयलेट क्लीनर को कभी एक साथ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे खतरनाक गैस बन सकती है. पीले निशानों से बचने का सबसे आसान तरीका नियमित सफाई है. टॉयलेट को सप्ताह में कम से कम एक बार अच्छी तरह साफ करने से मिनरल्स की मोटी परत बनने की संभावना कम हो सकती है. अगर आपके घर में हार्ड वॉटर आता है तो सफाई के बीच लंबा अंतर रखने से पीले निशान जल्दी वापस दिखाई दे सकते हैं. Silver Cleaning Tips: काले पड़ गए चांदी के बर्तन? घर पर ही ऐसे लौटेगी चमक जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं. ट्रैवल उनका इंटरेस्ट एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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