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डी. आर. डी. ओ. ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए एस. एफ. डी. आर. प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया

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डी. आर. डी. ओ. ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए एस. एफ. डी. आर. प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया
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डीआरडीओ ने आज ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से SFDR तकनीक का सफल प्रदर्शन किया।सुबह लगभग 10:45 बजे किया गया यह परीक्षण लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में भारत की क्षमता को बढ़ावा देगा।DRDOके अनुसार, यह टेस्ट ग्राउंड बूस्टर से शुरू होकर वांछित माच संख्या तक पहुंचने के बाद SFDR मोटर ने सुचारू रूप से काम किया। इससे भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास यह प्रोपल्शन सिस्टम उपलब्ध है। परीक्षण की सफलता ने डिफेंस सेक्टर में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित किया है। टेस्ट के दौरान नोजल-लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर जैसे सभी सबसिस्टम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किए। ITR, चांदीपुर के ट्रैकिंग इंस्ट्रूमेंट्स ने बे ऑफ बंगाल के किनारे फ्लाइट डेटा को कैप्चर किया, जिससे परफॉर्मेंस की पुष्टि हुई। यह टेक्नोलॉजी वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करके सस्टेनेबल सुपरसोनिक स्पीड बनाए रखती है, जिससे मिसाइल हल्की और लंबी रेंज वाली हो जाती है। पारंपरिक रॉकेट मोटर्स की तुलना में SFDR ईंधन दक्षता बढ़ाती है और मिसाइल को अधिक दूरी तक उच्च गति पर रखती है। DRDL, HEMRL, RCI और ITR की टीमों ने इसकी निगरानी की। रक्षा क्षेत्र में कितनी बड़ी सफलता इस सफलता से भारत रूस, अमेरिका, चीन और फ्रांस जैसे देशों की एलीट लीग में शामिल हो गया है। SFDR लंबी दूरी की BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) एयर-टू-एयर मिसाइलों जैसे Astra Mk-3 (गांडीव) के विकास के लिए अहम है, जिसकी रेंज 300-350 किलोमीटर तक हो सकती है और यह माच 4+ की स्पीड से उड़ सकता है। इससे IAF को दुश्मन के AWACS, टैंकर और लड़ाकू विमानों को सुरक्षित दूरी से निशाना बनाने में रणनीतिक बढ़त मिलेगी। रामजेट इंजन की जटिलता (सुपरसोनिक स्पीड पर स्थिर दहन) को मैनेज करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन DRDO ने इसे सफलतापूर्वक हासिल किया। यह Astra सीरीज (Mk-1: 80-110 km, Mk-2: 140-160 km) को आगे ले जाएगा। आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती पिछले वर्षों में DRDO ने SFDR के कई टेस्ट किए हैं (2018, 2021, 2023 आदि), लेकिन यह 2026 का प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण रहा। रूस की मदद से शुरू हुई यह तकनीक अब स्वदेशी हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री को बधाई दी। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को मजबूत करेगी, जिससे लंबी दूरी की मिसाइलें जल्दी तैनात हो सकेंगी। भविष्य में यह IAF की हवाई श्रेष्ठता बढ़ाएगा और निर्यात संभावनाएं खोलेगा। कुल मिलाकर, यह परीक्षण भारतीय रक्षा अनुसंधान की परिपक्वता दर्शाता है।

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