यमुना में अनुपचारित औद्योगिक कचरा और जहरीला पानी बहने से रोकने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने एक सख्त कदम उठाया है। दिल्ली के चार प्रमुख कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी)—ओखला, बादली, वजीरपुर और मायापुरी का संचालन और रख-रखाव औद्योगिक सोसायटियों से वापस लेकर दिल्ली सरकार के उद्योग विभाग को सौंपने के आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। डीपीसीसी के सदस्य सचिव संदीप मिश्रा द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि यमुना सफाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के सख्त निर्देशों के बावजूद ये सोसायटियां लगातार नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि टेकओवर की प्रक्रिया पूरी होने तक इन सोसायटियों को प्लांट का सही संचालन सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा, जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत डिफाल्टर सोसायटियों के खिलाफ अलग से कानूनी और आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी। निरीक्षण के दौरान प्लांट में पंप खराब, कचरे का अंबार, जंग लगी सीढ़ियां और अनुपचारित पानी सीधे नालों में बहाए जाने जैसी गंभीर खामियां पाई गईं। सोसायटी पर कुल 1.68 करोड़ (1,68,60,000/-) का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया था, जिसे इन्होंने जमा नहीं किया। डीपीसीसी ने सोसाइटी के अध्यक्ष को 10 दिनों के भीतर प्लांट का प्रभार उद्योग विभाग को सौंपने का निर्देश दिया है। संयुक्त निरीक्षण में पाया गया कि खतरनाक कचरा खुले में पड़ा था, क्लोरीनेशन सिस्टम बंद था और इन-हाउस प्रयोगशाला के केमिस्ट को बीओडी और सीओडी परीक्षण की प्रक्रिया तक का पता नहीं था। इस सोसाइटी पर 2.35 करोड़ (2,35,60,000/-) का जुर्माना बकाया है। सोसाइटी को 45 दिनों के भीतर टेकओवर प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। इसी तरह की गंभीर तकनीकी कमियों, मानकों पर खरा नहीं उतरने और बार-बार कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब या कोई ठोस सुधार योजना न देने के कारण वजीरपुर और मायापुरी सीईटीपी प्लांट्स का टेकओवर भी उद्योग विभाग द्वारा किया जाएगा। एटा वालों के लिए राहत भरी खबर, गंदे पानी से मिलेगी निजात; जलेसर में 17.20 करोड़ रुपये से बनेगा एसटीपी आगरा में सुधरेगा यमुना नदी का हाल, कम क्षमताओं वाले बनेंगे 10 एसटीपी; काम हुआ शुरू
डी. पी. सी. सी. ने यमुना प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली के सी. ई. टी. पी. का नियंत्रण संभाला
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