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दो उच्च पदस्थ अधिकारियों ने प्रशासनिक भूमिकाएँ छोड़ दींः रोमन सैनी और अभिषेक तिवारी के आश्चर्यजनक निर्णय

Amar Ujala•
दो उच्च पदस्थ अधिकारियों ने प्रशासनिक भूमिकाएँ छोड़ दींः रोमन सैनी और अभिषेक तिवारी के आश्चर्यजनक निर्णय
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ये भी पढ़ें-कौन हैं IPS अनुराग सुजानिया?: नौकरी छोड़कर चर्चा में आए, मुरैना-सागर शराब कांड से क्या है नाता?विज्ञापनइस सूची में सबसे चर्चित नाम रोमन सैनी का है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2013 में ऑल इंडिया 18वीं रैंक हासिल की थी। मध्यप्रदेश कैडर मिलने के बाद उनकी जबलपुर में सहायक कलेक्टर के रूप में पहली पोस्टिंग हुई। हालांकि, उन्होंने शुरुआती कार्यकाल में ही आईएएस की नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। इसके बाद दिसंबर 2015 में अपने मित्र गौरव मुंजाल और हिमेश सिंह के साथ मिलकर ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म अनएकेडमी को आगे बढ़ाया। आज वे इसके सह-संस्थापक के रूप में पहचाने जाते हैं। यानी जिस प्रशासनिक सेवा में पहुंचने के लिए लाखों युवा प्रयास करते हैं, उसे छोड़कर सैनी ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया।विज्ञापनये भी पढ़ें-त्विषा शर्मा केस: पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका कर दी खारिजमध्यप्रदेश कैडर के 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने भी जनवरी 2026 में सरकारी सेवा से अलग होने का फैसला किया। उस समय वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) में पदस्थ थे। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) मांगी थी। तिवारी का नाम नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय काम के लिए भी चर्चा में रहा है। बालाघाट में एसपी रहते हुए उनकी भूमिका के लिए उन्हें दो बार राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक मिला था। तिवारी ने साइबर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने के लिए वीआरएस लिया।ये भी पढ़ें-निवाड़ी की जैरोन खालसा नगर परिषद अध्यक्ष को हटाने के लिए 61.52% मतदान, 6 नवंबर को आएगा फैसलाअभिषेक तिवारी और अनुराग सुजानिया के मामलों में एक समानता सागर जिले से जुड़ी है। दोनों वहां एसपी रह चुके हैं। तिवारी के कार्यकाल के दौरान स्कूल की दीवार गिरने से नौ बच्चों की मौत की घटना के बाद उन्हें सागर से हटाया गया था। वहीं, सुजानिया के कार्यकाल में सितंबर 2026 में बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों का मामला सामने आया। इसके बाद 27 अक्टूबर को उन्हें सागर एसपी के पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भोपाल में एआईजी बनाया गया। महज चार दिन बाद 2 नवंबर को उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। उनका इस्तीफा अभी शासन की स्वीकृति की प्रक्रिया में है। डीजीपी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर गृह विभाग को भेज दिया है। अब गृह विभाग इस मामले में अपनी अनुशंसा तैयार कर मुख्य सचिव के सामने रखेगा। इसके बाद इस्तीफे से जुड़ी फाइल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास भेजी जाएगी। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा। बता दें कि सरकार ने 27 अक्टूबर को सुजानिया को सागर पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी से हटाकर पुलिस मुख्यालय में एआईजी बनाया था। इस तबादले के कुछ दिन बाद ही उन्होंने निजी कारण से इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल इस्तीफे पर सरकार की अंतिम मुहर लगना बाकी है।

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