नई दिल्ली:दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण को इस बार आम बजट में पर्याप्त तवज्जो नहीं मिली है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण जैसे गंभीर संकट पर कोई ठोस और अलग प्रावधान नजर नहीं आता। इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ी चूक माना जा रहा है और इसी वजह सेचिंता बढ़ी है।प्रदूषण नियंत्रण बोरडों और नैशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के लिए 2026-27 में 1091 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह 2025-26के संशोधित अनुमान 1300 करोड़ रुपये से 209 करोड़ रुपये कम है।इस कटौती पर जलवायु कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।उनका कहना है कि एक तरफ बजट घट रहा है, दूसरी तरफ उपलब्ध फंड का भी पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा। ऐसे समय में कमी हुई है, जब प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों और मौतों का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है।क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि बजट आवंटन में कमी से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की चिंताएं और बढ़ेंगी। एनसीएपी 2.0 का दायरा बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन बजट में वृद्धि न होने और 16वें वित्त आयोग से अतिरिक्त अनुदान की अनिश्चितता से योजनाओं पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस बजट में ज्यादा फोकस इंडस्ट्रियों और एनर्जी सेक्टर पर दिखा है।एनवायरोकैटलिस्ट के फाउंडर सुनील दहिया ने कहा कि बजट यह संकेत देता है कि प्रदूषण के मुख्य सोर्स को कंट्रोल करना सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। 82 नॉन-अटेनमेंट शहरों के लिए एनसीएपी का वास्तविक बजट पिछले साल के संशोधित अनुमानों से भी कम है। प्रदूषण से निपटने के लिए कोई नया कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया और ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी अलग से विशेष बजट नहीं रखा गया। अब उम्मीदें 16वें वित्त आयोग पर टिकी है।क्लाइमेट ट्रेंड की डायरेक्टर आरती खोसला ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने, एनसीएपी 2.0 को मजबूत बनाने और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए था, जिसकी कमी साफ खल रही है।
दिल्ली-एन. सी. आर. के वायु प्रदूषण संकट को बजट में नजरअंदाज किया गया 2026-27: विशेषज्ञों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की
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