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देवप्रयाग में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए उत्तराखंड के संस्थान एकजुट हुए

Amar Ujala
देवप्रयाग में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए उत्तराखंड के संस्थान एकजुट हुए
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देवप्रयाग। उत्तराखंड की देवभूमि में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई ऊंचाई देने के लिए दो प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों ने हाथ मिलाया है। श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने हाल ही में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय से भेंट की।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंप्रो. सुब्रह्मण्यम ने चर्चा के दौरान उत्तराखंड को भारतीय ज्ञान परंपरा का जन्मस्थान बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में क्षेत्र की भूमिका ऐतिहासिक रही है। फरवरी के दूसरे सप्ताह में देवप्रयाग में शिक्षकों के एक संयुक्त उपवेशन (सम्मेलन) के आयोजन पर सहमति जताई है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व तक दोनों संस्थानों की ओर से साझा विजन डॉक्यूमेंट जारी करने की योजना है जो राज्य में संस्कृत शिक्षा के भविष्य की रूपरेखा तय करेगा। संवादविज्ञापनविज्ञापन

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