नोएडा:उत्तर प्रदेश के नोएडा में दूषित पानी के यमुना नदी में बहाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होनी है। दरअसल, यमुना नदी में पहुंच रहे दूषित पानी को लेकर नोएडा अथॉरिटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने कोडली स्टॉर्म वॉटर ड्रेन से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में रखी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना ट्रीट किए सीवर के पानी को यमुना नदी में डाला जा रहा है। हालांकि, नोएडा अथॉरिटी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उनके पास क्षमता से अधिक ट्रीटमेंट प्लांट उपलब्ध है और 100 प्रतिशत सीवेज को ट्रीट किया जा रहा है।अथॉरिटी ने भी दी रिपोर्टसुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होनी है। हिंडन और यमुना नदी को दूषित करने के ही एक अन्य मामले में गुरुवार को एनजीटी में भी सुनवाई होगी। नोएडा अथॉरिटी ने कोर्ट को दी रिपोर्ट में बताया है कि शहर की 30 ड्रेनों में से 6 सूखी है और 24 की जियो-टैगिंग की जा चुकी है। कई ड्रेनों को एसटीपी या इन-सीटू वेटलैंड से जोड़ा गया है।नोएडा में कुल 411 एमएलडी क्षमता के एसटीपी मौजूद है, जबकि 240 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। अथॉरिटी के मुताबिक एसटीपी से ट्रीट किया गया पानी उद्योगों को बेचा जा रहा है और ड्रेनों को ट्रैप करने के लिए चरणबद्ध योजना पर काम चल रहा है।8 में से केवल 3 STP ही मानकों पर खरेसीपीसीबी ने कोर्ट को बताया कि दिसंबर 2025 में नोएडा के 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और 3 इन-सीटू वेटलैंड का सैंपल लिया गया। जांच में सामने आया कि 8 में से केवल 3 एसटीपी ही तय मानकों पर खरे उतरे, जबकि बाकी एसटीपी एक या अधिक प्रदूषण मानकों का पालन नहीं कर रहे थे। सभी एसटीपी अन्य मानकों पर तो ठीक पाए गए, लेकिन बीओडी (बायोकैमिकल ऑक्सिजन डिमांड) जैसे अहम मानक पर आधे से ज्यादा एसटीपी फेल रहे।यह जल प्रदूषण मापने का एक प्रमुख पैमाना है, अधिक बीओडी का मतलब पानी में अधिक प्रदूषण और कम ऑक्सीजन होता है। इसके कारण पानी में रहने वाले जीव मर जाते है। सबसे चिंतजनक बात यह रही कि यमुना में मिलने से ठीक पहले नोएडा ड्रेन के पानी में बीओडी की मात्रा काफी ज्यादा पाई गई।सीपीसीबी के अनुसार, यह संकेत है कि ड्रेन में बिना ट्रीट किए या अधूरा ट्रीट गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जो सीधे यमुना को प्रदूषित कर रहा है। जांच में कई जगह सीवर के आउटलेट पर प्रदूषण का स्तर ज्यादा मिला।ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हालत खराबग्रेटर नोएडा वेस्ट की ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों से निकलने वाले गंदे पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे नालों में बहाया जा रहा है। इस एरिया की विभिन्न सोसायटियों में एसटीपी प्लांट का संचालन नहीं किया जा रहा है, जिसकी वजह से गंदा पानी बेसमेंट एरिया या नालों में बहाया जा रहा है। ये पानी हिंडन नदी में जा रहा है, जिससे वह दूषित हो रही है। आरोप है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में शिकायत करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है।ग्रेटर नोएडा वेस्ट की विक्ट्री वन सेंट्रल सोसायटी में आठ टावरों में करीब 400 परिवार रह रहे हैं। सोसायटी परिवारों को पजेशन देने के बाद भी एसटीपी संचालित करने के दावे कागजों में ही रह गए हैं। विक्ट्री वन सेंट्रल वेलफेयर बायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत चौहान ने बताया कि परिसर में 11 टावर बने हुए हैं,लेकिन आठ टावरों में अधूरी सुविधा के बीच लोग रहने को मजबूर हैं। बेसमेंट एरिया मे बिल्डर प्रबंधन ने एसटीपी की मशीन लगी है, लेकिन वे संचालित नहीं हो रही।सेक्टर चार स्थित एम्स ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में 700 परिवार रह रहे हैं। सोसायटी के निवासी दुर्गेश शुक्ला ने बताया कि परिसर में माइंस वन बेसमेंट एरिया बना हुआ है। लोगों को फ्लैट का पजेशन दिए हुए सालों बीत गए हैं, लेकिन आज तक एसटीपी की व्यवस्था नहीं की गई है। सबसे नीचे वाली बेसमेंट एरिया में गंदा पानी भरा रहता है। इसकी वजह से पूरे एरिया में गंदगी फैली पड़ी रहती है। साथ ही ये गंदा पानी विभिन्न नालों के जरिए हिंडननदी में जा रहा है।हिंडन का पानी पीने और नहाने लायक नहीं रहा है। इस नदी की फीकल कोलिफॉर्म तीन लाख 30 हजार एमपीएन प्रति 100 एमएल पहुंच गया है। नदियों में ये 500 तक होना चाहिए। वहीं पीने के पाने में ये 50 होना चाहिए।
नोएडा प्राधिकरण और सी. पी. सी. बी. ने यमुना नदी में दूषित जल निर्वहन पर रिपोर्ट प्रस्तुत की
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