राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद के डिग्गी तालाब में मौत को गले लगाने वाला प्रॉपर्टी कारोबारी किशन दोधानी अपनी मौत से 7 दिन पहले एसपी ऑफिस गया था. वहां उसने सरेंडर करने की गुहार लगाई और मीडियाकर्मियों को अपनी पूरी आपबीती सुनाई थी. सिटी थाना पुलिस और NDRF की टीम ने कल तालाब से उसका शव निकाला. मृतक के परिवार में पत्नी और 12 व 8 साल की दो बेटियां हैं. किशन ने SP ऑफिस में मीडिया को बताया था कि नसीराबाद निवासी दोस्त अनिल ने कहा कि उसका जीजा संजय विदेश में नौकरी दिलाएगा. दिल्ली में इंटरव्यू की बात कही गई लेकिन वहां पहुंचने पर हैदराबाद से बैंकॉक जाने को कहा गया. किशन अपनी पत्नी और बच्चियों के साथ बैंकॉक पहुंच गया. 8 दिन बाद इंटरव्यू रद्द होने की बात कहकर वापस बुलाया गया और साथ में होटल में दिया गया चॉकलेट का ब्रीफकेस लाने को कहा गया. किशन को पता नहीं था कि उसमें ड्रग्स है. मुंबई पहुंचकर उसने संजय के बताए आदमी को ब्रीफकेस दे दिया. 2 मार्च को फोन आया कि टोंक आ जाओ खतरा है. वहां पहुंचने पर किशन का मोबाइल ले लिया गया. 5 दिन कोटा में एक दोस्त के घर रखा गया फिर मथुरा बुलाया गया लेकिन वहां कोई नहीं मिला. इसी दौरान पता चला कि ब्रीफकेस में ड्रग्स थी जो पकड़ी जा चुकी है और मुंबई पुलिस उसे ढूंढ रही है. किशन के वकील चंद्रशेखर ने बताया कि 12 मार्च को किशन उनके पास आया था. उन्होंने एसपी ऑफिस में सरेंडर करने की सलाह दी. किशन ने कहा था कि पिछले 10 दिन से इधर-उधर छुपता फिर रहा हूं. कर्ज से भी परेशान हूं और अब सरेंडर करने आया हूं. SP ऑफिस में पुलिस ने मामला अजमेर का नहीं होने के कारण सरेंडर लेने से मना कर दिया. इसके 7 दिन बाद नसीराबाद के डिग्गी तालाब में किशन ने जीवन समाप्त कर लिया. यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है कि एक निर्दोष को धोखे से ड्रग तस्करी में फंसाया गया और जब उसने सरेंडर करने की कोशिश की तो कोई सुनवाई नहीं हुई.
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