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पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने पर विवाद के बीच भारत ने मेटा अमेरिकी कानूनों से कहा कि वे स्थानीय स्तर पर काम नहीं कर सकते

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पीएम मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाने पर विवाद के बीच भारत ने मेटा अमेरिकी कानूनों से कहा कि वे स्थानीय स्तर पर काम नहीं कर सकते
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मेटा को भारत सरकार ने स्पष्ट कह दिया है कि भारत में अमेरिकी कानून नहीं चल सकता है. यह बयान तब दिया है, जब एल्गोरिदम पर मेटा और सरकार के बीच चर्चा छिड़ गई है. यह पूरा विवाद पीएम नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट को थोड़ी देर के लिए हटाने जाने के मामले से जुड़ा है. ऐसे में सरकार ने मेटा के अधिकारियों से पूछा है कि आईटी कंपनी भारतीय कानूनों का पालन कर रही है या नहीं. अधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि गुरुवार 6 अगस्त 2026 सरकार और मेटा की वैश्विक टीम के बीच इस मुद्दे पर बातचीत अब भी जारी है. इस दौरान मेटा के अधिकारियों से कंपनी के एल्गोरिद्म, अनुपालन व्यवस्था में पर्याप्त संतुलन एवं नियंत्रण और संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों (Legality) को पूरा करने के लिए सुरक्षा उपायों के बारे में भी सवाल किए जाएंगे. सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव गुरुवार को मेटा की वैश्विक टीम से मुलाकात कर रहे हैं. इसके बाद मंत्रालय की टेक्निकल टीमों के साथ बातचीत आगे भी जारी रहेगी. इससे पहले अमेरिका स्थित इस प्रौद्योगिकी कंपनी ने मोदी की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने की घटना पर माफी मांगी थीं. साथ ही, बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री, डीपफेक और भुगतान के बदले कुछ सामग्री को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी चूक स्वीकार की थी. मेटा के Global Affairs Chief जोएल कैपलन ने एक लिखित बयान में भी दिया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट पर लगे बैन की गलती के लिए मंत्री से माफी मांगी. सूत्रों का कहना है, 'मेटा की तरफ से यह माफी कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग की ओर से आई थी. प्रधानमंत्री मोदी की फेसबुक पर साझा की गई एक पोस्ट को कुछ देर के लिए हटा दिया गया था. हालांकि, कुछ समय बाद ही मेटा ने इस पोस्ट को तकनीकी चूक बताते हुए बहाल कर दिया था.' सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी कि मेटा टीम के साथ मीटिंग का दौर 3 से 4 दिन चलेगा. मेटा की ग्लोबल टीम कुछ और दिन भारत में रहेगी. तीन से चार और मीटिंग होने की उम्मीद है. बातचीत के अगले दौर में व्हाट्सएप से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी. इन बैठकों का मुख्य एजेंडा यह पता लगाना है कि क्या मेटा के प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों का पालन कर रहे हैं. यह जानकारी सरकारी सूत्रों ने दी है. सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत में प्लेटफॉर्म्स को अमेरिकी कानूनों के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता. ये तकनीकी मामले हैं. हर पहलू को समझना जरूरी है. मकसद कानून का इस्तेमाल समाज के भले के लिए करना है. नवंबर 2025 एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर कंसल्टेंट अपनी भूमिका निभा रहा हूं. मीडिया का अनुभव करीबन साढ़े 8 साल का है. देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुका हूं. पिछले कुछ सालों में बतौर मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर, कंटेंट एडिटर, सब एडिटर और रिजनल टीवी चैनल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. लेखन, ग्राफिक्स और वीडियो प्रोडक्शन की बारीक समझ है. नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क की भी जिम्मेदारी संभाल चुका हैं. मजा ग्राउंड या एक्सक्लूसिव रिपोर्ट कवर करने में आता है. साल 2016 में माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी भोपाल से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया और पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना, कहानियां-कविताएं लिखना और घूमना विशेष रुचियों में दर्ज है.

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