पटना की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती का सख्त आदेश जारी किया है. विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार मालवीय की अदालत ने यह फैसला आरोपियों के लंबे समय से अदालत में पेश न होने के कारण लिया है. इस मामले में सांसद के अलावा शैलेंद्र प्रसाद और चंद्र नारायण प्रसाद को भी नामजद किया गया है, जिन्हें कोर्ट की कार्रवाई में शामिल न होने का दोषी माना गया है. यह कानूनी कार्रवाई करीब 31 साल पुराने एक विवाद से जुड़ी है, जो साल 1995 में शुरू हुआ था. 1995 में पटना के गर्दनीबाग थाने में (प्राथमिकी संख्या 552/1995) मामला दर्ज कराया गया था. शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल का आरोप था कि उनका मकान धोखाधड़ी के जरिए किराए पर लिया गया था. मकान मालिक को बाद में पता चला कि उनके घर का इस्तेमाल सांसद का कार्यालय चलाने के लिए किया जा रहा था, जबकि किराए पर लेते समय तथ्यों को छुपाया गया था. 1990 का दशक बिहार में बाहुबली राजनीति का चरम दौर था, खासकर कोसी-सीमांचल क्षेत्र में. पप्पू यादव (राजेश रंजन) भी इस दौर में एक बड़ा नाम बना. 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान पप्पू यादव ने अपने चुनावी हलफनामे में 41 आपराधिक मामले (criminal cases) दर्ज होने की जानकारी दी थी. इनमें हत्या, अपहरण, धमकी, दंगा, रंगदारी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. कुछ मामलों में सजा हो चुकी है (जैसे आजीवन कारावास, बाद में अपील में राहत), लेकिन अधिकांश लंबित हैं. 1990 बिहार विधानसभा चुनाव में वे सिंहेश्वर (मधेपुरा जिला) सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए. इसके बाद से उनका बिहार की राजनीति में भी कद बढ़ता गया और आज वह पूर्णिया से निर्दलीय सांसद हैं.
पटना की अदालत ने लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के लिए सांसद और दो अन्य के खिलाफ संलग्नक आदेश जारी किया
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