नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शुक्रवार (6 नवंबर) को श्रीनगर में पार्टी के बागी विधायकों के साथ आमने-सामने की एक अहम बैठक करेंगे. यह बैठक सुबह 10:30 बजे श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित फारूक अब्दुल्ला के आवास पर होगी. इस महत्वपूर्ण पहल का मकसद पार्टी के भीतर तेजी से बढ़ रहे असंतोष को थामना है. यह असंतोष 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल फेरबदल और उसके बाद श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के पार्टी छोड़ने की घटना के बाद पैदा हुआ है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुद को दरकिनार महसूस कर रहे हैं- जिनमें सात बार के विधायक मुबारक गुल और वरिष्ठ विधायक नजीर अहमद गुरेजी शामिल हैं. बागी गुट ने अपनी शिकायतों का एक मसौदा तैयार किया है, जिसे पार्टी अध्यक्ष को भेज दिया गया है. नेताओं का यह गुट हाल ही में गठित मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव की मांग कर रहा है. उनकी मांग है कि मौजूदा मंत्री इस्तीफा दें, ताकि उन वरिष्ठ नेताओं के लिए जगह बन सके जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया गया था. ये विधायक मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकारों- खास तौर पर नासिर असलम वानी और शम्मी ओबेरॉय को तुरंत हटाने की भी मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि इन लोगों की वजह से फैसले लेने की प्रक्रिया एक छोटे, बिना चुने हुए 'इनर सर्कल' (भीतरी दायरे) तक ही सीमित होकर रह गई है. विधायक पार्टी नेतृत्व पर इस बात के लिए भी जोर डाल रहे हैं कि वे 2024 के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए एक तय समय-सीमा के साथ ठोस कदम उठाएं. इनमें मुख्य रूप से अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्य का दर्जा वापस पाना, और रोजगार व बिजली जैसी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असंतुष्ट विधायकों की संख्या 18 से 25 के बीच बताई जा रही है. इस गुट ने एक ठोस रणनीति बनाने और एकजुट होकर अपनी बात रखने के लिए कई बार बंद कमरे में बैठकें की हैं. खबरों के मुताबिक, गुरुवार (05 नवंबर) को विधायक मुबारक गुल के आवास पर इन विधायकों की चौथी बैठक हुई, जिसमें बागी विधायकों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया. इससे पहले, पार्टी और मुख्यमंत्री पर दबाव बनाने के लिए विधायकों ने 30 अक्टूबर को विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर, 2 नवंबर को विधायक फारूक शाह के आवास पर और 4 नवंबर को विधायक नजीर गुरेजी के आवास पर बैठकें कीं. इसलिए, यह बैठक बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इसका नतीजा NC और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार का भविष्य तय करेगा. हालांकि मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के पास विधानसभा की 90 में से 54 सीटों का मजबूत बहुमत है, लेकिन अगर असंतुष्ट गुट के कई विधायक एक साथ इस्तीफा दे देते हैं, तो सदन में बहुमत का आंकड़ा काफी कम हो सकता है. इससे उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व की स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट और शीर्ष सलाहकारों को लेकर काफी मतभेद हैं, लेकिन उम्मीद है कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला अपने राजनीतिक अनुभव और कद का इस्तेमाल करके कोई आपसी समझौता करा लेंगे, ताकि पार्टी में कोई सार्वजनिक फूट न पड़े.
पार्टी में अशांति के बीच नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं ने संकटकालीन बैठक की
ABP News•

Full News
Share:
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Achira News.
Publisher: ABP News
Want to join the conversation?
Download our mobile app to comment, share your thoughts, and interact with other readers.