। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु वामन अवतार की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी के दिन श्री हरि और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। तो आइए जानते हैं कि परिवर्तिनी एकादशी के दिन विष्णु जी को क्या भोग अर्पित करना चाहिए और पूजा मंत्र क्या है। साथ ही जानिए एकादशी पूजा का नियम। जगत के पालनहार भगवान विष्णु को पंचामृत अत्यंत प्रिय है इसलिए इसका भोग जरूर लगाएं। दूध, दही, चीनी, शहर और घी को मिलाकर पंचामृत तैयार किया जाता है। एकादशी के दिन विष्णु जी को पंचमेवा भी जरूर चढ़ाएं। पंचमेवा में बादाम, काजू, छुआरा, किशमिश और मखाना आता है। श्री हरि विष्णु को पीला रंग बेहद पसंद है तो एकादशी के दिन बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, पीला पेड़ा या केसरिया रंग की खीर भी अर्पित करें। एकादशी के दिन चावल बनाना वर्जित है तो आप खीर साबूदाना की बना सकते हैं। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को मौसमी फल जैसे- केला, सेब, अनार आदि फलों का भी भोग लगाएं। ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥ ॐ नमोः नारायणाय॥ ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
परिवर्तनिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजाः प्रसाद और मंत्र
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