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पश्चिम एशिया संघर्ष ने तेल की बढ़ती कीमतों और एलपीजी की कमी से भारतीय एमएसएमई को प्रभावित किया

Amar Ujala
पश्चिम एशिया संघर्ष ने तेल की बढ़ती कीमतों और एलपीजी की कमी से भारतीय एमएसएमई को प्रभावित किया
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विस्तारAdd as a preferredsource on googleपश्चिम एशिया में संघर्ष का असर अब लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पर दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें जो लगातार बढ़ रही हैं और लगभग 114 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। वहीं एलपीजी की कमी ने भी कारोबारियों को परेशान कर दिया हैं। विशेषज्ञों का कहना है, भारत के एमएसएमई क्षेत्रों के लिए तेल की बढ़ती कीमतें परिचालन की लागत को बढ़ा रही हैं। लागत में वृद्धि होने से निर्माताओं और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है।और पढ़ेंTrending Videosयह वीडियो/विज्ञापन हटाएंसिरेमिक उद्योग के रेवन्यू में एक से दो फीसदी तक कमी आने की संभावनानुवामा और क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार गैस और प्रोपेन की आपूर्ति में व्यवधान से टाइल्स निर्माताओं का कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनके मुनाफे में कमी आई है और उत्पादन लगात भी बढ़ी है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक नितिन कंसल ने कहा पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से सिरेमिक उद्योग को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। विशेषकर गैस सप्लाई की उपल्ब्धता और विदेशी बाजार के लिए बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागत का सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। अगर यही स्थिति अगले दो से तीन हफ्ते तक बनी रहती हैं, तो इससे कंपनियों को लंबे समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। इससे उन्हें काफी नुकसान हो सकता है और चालू वित्तीय वर्ष में रेवन्यू में एक से दो प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। नुवामा के अनुसार सिरेमिक उद्योग अपना 25 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करता है, जो कि पश्चिम एशिया के बाजारों से जुड़ा हुआ है और वर्तमान में चल रहे सघर्ष की वजह से प्रभावित हुआ है।विज्ञापनविज्ञापनतेल की बढ़ती कीमतें एमएसएमई की परिचालन की लागत को बढ़ा रही हैंश्रीराम वेल्थ लिमिटेड के सीओओ और उत्पाद प्रमुख, नवल कागलवाला कहते हैं, एमएसएमई क्षेत्रों के लिए तेल की बढ़ती कीमतें परिचालन की लागत को बढ़ा रही हैं। लागत में वृद्धि होने से निर्माताओं और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई की लागत बढ़ जाती है। प्लास्टिक, पैकेजिंग, केमिकल और कपड़े में उपयोग होने वाले पेट्रोकेमिकल जैसे कच्चे माल महंगे हो रहे हैं। कार्यशील पूंजी का दबाव बढ़ेगा, क्योंकि उच्च इनपुट लागत मार्जिन को कम करता है और कार्यशील पूंज वित्तपोषण की जरूरत को बढ़ाता है। वहीं दूसरी ओर भारत की तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता और रुपये के अवमूल्यन से छोटे व्यवसायों पर वित्तीय दबाव और बढ़ जाता है।मांग में मंदी आने की आशंकाजानकार कहते हैं अगर संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो कच्चे तेल और ऊर्जा क्षेत्रों में कीमतें उच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना है। इसकी वजह से महंगाई बढ़ती है तो उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे एमएसएमई उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि मौजूदा समय में शहरी और ग्रामीण बाजार में उपभोक्ता मांग स्थिर बनी हुई है। बावजूद इसके लोग सतर्क होकर अपनी खरीदारी कर रहे हैं।विज्ञापनविज्ञापनसबसे विश्वसनीयHindi Newsवेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ेंकारोबार समाचारऔरUnion Budgetसे जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसेपर्सनल फाइनेंस, लाइवप्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्टबैंकिंग बीमाइन हिंदी,ऑनलाइन मार्केटन्यूज़, लेटेस्टकॉरपोरेट समाचारऔरबाज़ारआदि से संबंधितब्रेकिंग न्यूज़।रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करेंअमर उजाला हिंदी न्यूज़ APPअपने मोबाइल पर।

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